बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर देशवासियों को बधाई देते हुए केंद्र और राज्य सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश की जनता स्वतंत्रता दिवस का जश्न जरूर मनाए, लेकिन ‘विकसित भारत’ और ‘मेरा भारत महान’ का सपना तभी साकार होगा, जब सरकारें जनता के प्रति अपनी जवाबदेही निभाएं। उन्होंने सरकारों से अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाने की मांग की।मायावती ने कहा कि देश की जनता कई समस्याओं से जूझ रही है। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस मनाने के साथ सरकारों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि युवाओं को बेहतर भविष्य के लिए जरूरी अवसर मिलें। उन्होंने कहा कि देश की युवा पीढ़ी अब सरकारों से जवाबदेही मांग रही है। ऐसे में सरकारों को जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना होगा।
‘चेक एंड बैलेंस’ व्यवस्था प्रभावी बनाने पर जोर
बसपा प्रमुख ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संविधान में विभिन्न संवैधानिक संस्थाओं के बीच ‘चेक एंड बैलेंस’ की व्यवस्था की थी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि कोई भी संस्था निरंकुश होकर काम न कर सके।
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उन्होंने कहा कि इस संवैधानिक व्यवस्था को सही मायने में प्रभावी बनाना जरूरी है, ताकि देश में किसी भी व्यक्ति या संस्था के निरंकुश होने की स्थिति पैदा न हो। इससे समाज के सभी वर्गों को समान रूप से आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
52% आबादी 30 साल से कम, युवाओं के भविष्य पर सवाल
मायावती ने कहा कि भारत की करीब 52 प्रतिशत आबादी 30 वर्ष से कम उम्र की है। ऐसे में सरकारों को यह देखना चाहिए कि देश का युवा असमानता और असमान अवसरों का सामना क्यों कर रहा है।उन्होंने कहा कि सरकारें युवाओं को बेहतर भविष्य देने के लगातार वादे करती हैं, लेकिन जब इन योजनाओं और वादों का अपेक्षित लाभ नहीं मिलता तो युवा व्यवस्था में बैठे लोगों से जवाबदेही मांगने के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर होते हैं।
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दलितों, किसानों और मजदूरों का भी उठाया मुद्दा
बसपा प्रमुख ने अपने स्वतंत्रता दिवस संदेश में दलितों, आदिवासियों, पीड़ितों और अन्य उपेक्षित वर्गों के साथ गरीबों, मजदूरों, किसानों, युवाओं, महिलाओं और बेरोजगारों का भी मुद्दा उठाया।
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उन्होंने कहा कि सरकारों को करोड़ों मेहनतकश लोगों को बार-बार उनके ‘दायित्व’ की याद दिलाने के बजाय पहले अपने संवैधानिक दायित्व और कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करना चाहिए। जनता के अधिकारों और हितों की रक्षा करना सरकारों की जिम्मेदारी है।
बोलीं- सिर्फ जश्न नहीं, जवाबदेही भी जरूरी
मायावती के स्वतंत्रता दिवस संदेश में शुभकामनाओं के साथ सरकारों की जवाबदेही का मुद्दा प्रमुख रहा। उन्होंने युवा आबादी और उसके भविष्य के साथ संविधान में तय संस्थागत संतुलन को भी केंद्र में रखा।उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह सरकारों के कामकाज और जनता के अधिकारों की समीक्षा का भी समय है। मायावती ने ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को युवाओं, गरीबों, किसानों, महिलाओं और वंचित वर्गों के वास्तविक विकास से जोड़ते हुए सरकारों से अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियां निभाने की अपील की।
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