विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से गुरुवार को काशी में मौन जुलूस निकाला गया। भारत विभाजन की त्रासदी में जान गंवाने वाले ज्ञात-अज्ञात बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए निकाला गया जुलूस जेपी मेहता कॉलेज से शुरू होकर सर्किट हाउस पहुंचा।
जुलूस में प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। सर्किट हाउस पहुंचने के बाद विभाजन की त्रासदी झेलकर भारत आए परिवारों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के मंत्री रविंद्र जायसवाल सहित वाराणसी के स्थानीय जनप्रतिनिधि और भाजपा पदाधिकारी मौजूद रहे।
पत्रकारों से बातचीत में मंत्री रविंद्र जायसवाल ने कहा कि 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ, लेकिन उससे एक दिन पहले 14 अगस्त को भारत ने विभाजन की त्रासदी झेली। इस दौरान लाखों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी और बड़ी संख्या में परिवारों को अपना घर-बार छोड़कर भारत आना पड़ा।
उन्होंने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाने का उद्देश्य किसी के प्रति वैमनस्य पैदा करना नहीं, बल्कि उस त्रासदी को याद करना और उससे सीख लेकर भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए समाज को जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि विभाजन का दर्द झेलकर भारत आए परिवारों ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद देश के प्रति अपना प्रेम और विश्वास बनाए रखा।
मंत्री ने कहा कि विभाजन के प्रत्यक्षदर्शियों के अनुभव आज की पीढ़ी के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। उनके अनुभव उस दौर की पीड़ा और संघर्ष को समझने का अवसर देते हैं। ऐसे परिवारों का सम्मान उनके त्याग, संघर्ष और राष्ट्र के प्रति समर्पण को नमन है।रविंद्र जायसवाल ने केंद्र और प्रदेश सरकार की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रोजगार और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में लगातार कार्य किया जा रहा है। साथ ही देश की बेटियां विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रही हैं और सरकार उनके सम्मान एवं प्रोत्साहन के लिए निरंतर प्रयासरत है।कार्यक्रम के दौरान स्वतंत्र देव सिंह और रविंद्र जायसवाल के बयान भी लिए गए।




