लखनऊ। अलीगंज अग्निकांड के बाद अवैध निर्माणों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती से राजधानी में हलचल बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट के न्याय मित्र इसी महीने लखनऊ पहुंचकर चिह्नित अवैध भवनों का स्थलीय निरीक्षण करेंगे। जांच के दायरे में 51 भवन हैं, जिनमें पूर्व राज्यपाल, पूर्व कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री, विधायक, कारोबारी और वरिष्ठ अधिवक्ताओं से जुड़ी संपत्तियां भी शामिल बताई जा रही हैं।
लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने सभी चिह्नित भवनों का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया है। इसमें भवन की मंजिलों की संख्या, निर्माण का समय, उस दौरान तैनात अधिकारियों के नाम, अब तक की गई कार्रवाई और कार्रवाई नहीं होने के कारणों की जानकारी शामिल है।सूत्रों के मुताबिक, एक पूर्व राज्यपाल और पूर्व कैबिनेट मंत्री से जुड़े तीन-तीन भवन जांच के दायरे में हैं। वहीं, एक राज्य मंत्री से संबंधित भवन को भी अवैध निर्माण की श्रेणी में चिह्नित किया गया है। हालांकि, इन भवनों पर बुलडोजर चलेगा या नहीं, यह जांच और नियमानुसार कार्रवाई के बाद ही तय होगा।
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सुप्रीम कोर्ट ने एलडीए को शहर में भवन निर्माण नियमों की अनदेखी और रिहायशी संपत्तियों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों का सर्वे करने का निर्देश दिया है। एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने अदालत को बताया है कि 51 संपत्तियों की पहचान कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है और इसे तय समय में पूरा किया जाएगा। |
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न्याय मित्र के निरीक्षण के बाद तैयार रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की जाएगी। साथ ही अलीगंज अग्निकांड से जुड़े मामले में एसआईटी की रिपोर्ट भी अहम होगी, जिसमें लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका सामने आने की संभावना है।  |
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