रामनगर में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब काशी राजपरिवार से जुड़े हाथी धनराज ने खाना मिलने में देरी के बाद अपनी बेड़ियां तोड़ दीं और पास स्थित पंपासर पोखरे में जा उतरा। हाथी के अचानक तालाब में पहुंचने से वहां स्नान कर रहे लोगों में भगदड़ की स्थिति बन गई। घटना की जानकारी मिलते ही मुख्य महावत इजराइल समेत अन्य महावत मौके पर पहुंचे और हाथी को बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया।
बताया गया कि सोमवार सुबह करीब 11:30 बजे भोजन मिलने में देरी से धनराज नाराज हो गया। उसने अपनी बेड़ियां तोड़ दीं और कुछ दूरी पर स्थित पंपासर पोखरे में उतर गया। हाथी को तालाब में देखकर आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। कुछ ही देर में बड़ी संख्या में लोग धनराज को देखने के लिए मौके पर जुट गए।
महावतों ने उसे शांत करने के साथ तालाब से बाहर निकालने की कोशिश की। दूर से पेड़ की डालियां और खाना दिखाकर धनराज को बाहर आने के लिए मनाया गया, लेकिन वह काफी देर तक तालाब से बाहर नहीं आया। करीब चार घंटे तक चली मान-मनौव्वल के बाद शाम लगभग चार बजे धनराज तालाब से बाहर निकला। बाहर आते ही उसे खाना खिलाया गया। इसके बाद महावतों ने उसकी स्थिति पर नजर रखी और शांत होने के बाद उसे वापस रामलीला स्थल पर ले गए। घटना के दौरान पंपासर पोखरे के आसपास काफी देर तक लोगों की भीड़ जुटी रही।
रामनगर की प्रसिद्ध रामलीला के लिए आजमगढ़ के जीयनपुर से हर वर्ष चार हाथियों को लाया जाता है। ये हाथी महावतों के साथ पंचवटी मैदान स्थित खुले बगीचे में रहते हैं। धनराज भी इन्हीं हाथियों में शामिल है। धनराज का काशी राजपरिवार से भी खास जुड़ाव बताया जाता है। पिछले करीब छह वर्षों से काशी राजपरिवार के अनंत नारायण सिंह इसी हाथी की पीठ पर सवार होकर रामनगर की रामलीला देखने पहुंचते हैं। ऐसे में रामलीला के दौरान धनराज के अचानक तालाब में चले जाने से आयोजन से जुड़े लोगों में भी चिंता बनी रही। हालांकि बाद में उसे सुरक्षित बाहर निकालकर भोजन कराया गया और महावत उसे वापस रामलीला स्थल ले गए।


