वाराणसी में तीज को लेकर इस बार बाजार में हल्की साड़ियां, घाट पैटर्न और बंधेज साड़ियों की मांग सबसे ज्यादा है। महिलाओं की पहली पसंद ऐसी साड़ियां बन रही हैं जिन्हें पहनना आसान हो और लुक भी अलग दिखे। व्यापारियों के मुताबिक रेडीमेड ब्लाउज और बेल्ट वाली साड़ियों का भी नया ट्रेंड है, ग्राहक अब डिजाइन के साथ सुविधा को भी तवज्जो दे रहे हैं। बंधेज साड़ियों के लिए कपड़ा बनारस से राजस्थान जाता है, वहां प्रिंटिंग के बाद वापस बनारस में उस पर बनारसी कढ़ाई और फिनिशिंग का काम होता है।
हालांकि कारोबारियों का कहना है कि इस बार तीज पर बिक्री पिछले सालों के मुकाबले कमजोर है। बाजार में पहले जैसी रौनक नहीं दिख रही है। सबसे बड़ी चुनौती ग्राहकों की उम्मीद को लेकर है, दुकानदारों के मुताबिक ग्राहक 20 हजार की बनारसी साड़ी को 2 हजार में मांगते हैं। सोशल मीडिया और इंस्टाग्राम पर महंगी साड़ियों की फोटो देखकर ग्राहक उसी डिजाइन को सस्ते में चाहते हैं, जबकि शुद्ध सिल्क की कीमत 7 से 8 हजार रुपये किलो तक पहुंच गई है और प्रोसेसिंग में 30-35% नुकसान होता है।
साड़ी व्यापारी नितेश नरसिंहारी और राजन जायसवाल ने बताया कि उनका परिवार 64 साल से इस कारोबार में है, लेकिन पिछले 10 सालों में हर साल करीब 30% की गिरावट आ रही है। हाथ से बनी एक साड़ी तैयार होने में 1 से 2 महीने लगते हैं, जबकि मशीन से एक दिन में 2-3 साड़ियां बन जाती हैं। इसी लागत के अंतर के कारण सूरत की मशीन से बनी सस्ती साड़ियां बाजार में बनारसी बताकर बेची जा रही हैं, जिससे असली हाथ की बनारसी साड़ी के व्यापार को नुकसान हो रहा है। साथ ही हर 3 से 6 महीने में ट्रेंड बदलने से कारीगरों को हमेशा नया करना पड़ रहा है।


