पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की कामना को लेकर सुहागिन महिलाएं 14 सितंबर, सोमवार को हरतालिका तीज का व्रत रखेंगी। वहीं कुंवारी कन्याएं मनचाहे और सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत करती हैं। कई स्थानों पर इसे तीजा व्रत के नाम से भी जाना जाता है। भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित यह व्रत कठिन व्रतों में शामिल है, जिसमें महिलाएं 24 घंटे निर्जला उपवास रखती हैं।
पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर रविवार सुबह 7:09 बजे शुरू होकर 14 सितंबर सोमवार सुबह 7:07 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर को रखा जाएगा।
सुबह 6:05 से 7:06 बजे तक पूजा का मुहूर्त
हरतालिका तीज पर भगवान शिव, माता पार्वती और श्रीगणेश की विधि-विधान से पूजा की जाती है। प्रातःकाल पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6:05 से 7:06 बजे तक रहेगा। वहीं प्रदोष काल में पूजा का समय शाम 5:43 से 7:13 बजे तक रहेगा। इस दौरान व्रत कथा का पाठ या श्रवण करना भी शुभ माना जाता है।
15 सितंबर को भद्रा समाप्त होने के बाद होगा पारण
इस बार हरतालिका तीज पर भद्रा का साया भी रहेगा। दिए गए पंचांग के अनुसार भद्रा 14 सितंबर को रात 7:20 बजे शुरू होकर 15 सितंबर की सुबह 7:44 बजे समाप्त होगी। ऐसे में व्रत का पारण 15 सितंबर को भद्रा समाप्त होने के बाद सुबह 7:44 बजे के पश्चात किया जा सकेगा।
शिव को पाने के लिए माता पार्वती ने रखा था व्रत
पौराणिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या कर रही थीं। उनके पिता हिमालय उनका विवाह भगवान विष्णु से कराना चाहते थे। यह जानकर माता पार्वती की सखियां उन्हें वन में ले गईं और वहां उन्होंने मिट्टी से शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की आराधना की। उनकी कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया। मान्यता है कि सखियों द्वारा माता पार्वती का हरण किए जाने के कारण ही इस व्रत का नाम हरतालिका पड़ा।


