मातृ नवमी के अवसर पर दशाश्वमेध घाट पर अजन्मी बेटियों की आत्मा की शांति और कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ जनजागरूकता का अनूठा संदेश दिया गया। आगमन सामाजिक संस्था की ओर से संस्थापक सचिव डॉ. संतोष ओझा के नेतृत्व में वैदिक आचार्यों के सानिध्य में करीब 10 हजार अजन्मी बेटियों का पिंडदान, तर्पण, पंचबलि और ब्राह्मण भोज कराया गया।सुबह से ही संस्था के कार्यकर्ता दशाश्वमेध घाट पर जुटने लगे। गंगा की पवित्र मिट्टी से विशेष पिंड वेदी तैयार की गई। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जौ के आटे, जौ-तिल, शहद, घी, शक्कर और दूध से पिंड तैयार किए गए। प्रत्येक पिंड को अजन्मी बेटी के प्रतीक के रूप में स्थापित कर पूजन किया गया और उनकी आत्मा की शांति व सद्गति के लिए प्रार्थना की गई। इसके बाद वैदिक विधि से तर्पण कर पिंडों का गंगा में विसर्जन किया गया।
डॉ. संतोष ओझा ने कहा कि यह अनुष्ठान केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ समाज को जगाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में बेटियों को लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है, ऐसे में उन्हें जन्म से पहले ही समाप्त करना समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है।आगमन संस्था की ओर से वर्ष 2001 से महिला सशक्तिकरण और कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। संस्था का यह 13वां वार्षिक पिंडदान अनुष्ठान बताया गया। इस वर्ष के 10 हजार पिंडों को मिलाकर अब तक 1.60 लाख से अधिक अजन्मी बेटियों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किए जाने का दावा किया गया।
वैदिक अनुष्ठान का मार्गदर्शन आचार्य पं. दिनेश दुबे, पं. धनंजय तिवारी और पं. सीताराम ने किया। आयोजन में राहुल गुप्ता, हरिकृष्ण प्रेमी, शिव जी, जितेंद्र किरण जादूगर, भानु प्रताप, संतोषी, साधना, कुंदन, लव तिवारी, अजय दूबे, रामबली मौर्य, प्रताप मिश्रा, आशुतोष, अरुण गुप्ता, मदन गुप्ता और लखन जी सहित कई कार्यकर्ताओं ने सहयोग किया।


