आईआईटी-बीएचयू के दीक्षांत समारोह में उपलब्धियों का जश्न, हरजस कौर ने 15 मेडल जीतकर बढ़ाया संस्थान का गौरव

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बीएचयू का 15वां दीक्षांत समारोह शनिवार को स्वतंत्रता भवन सभागार में भव्य एवं गरिमामय माहौल में संपन्न हुआ। सुबह 10 बजे मंगलाचरण मंत्रों के बीच समारोह की शुरुआत हुई। आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्हें उनके विशिष्ट योगदान के लिए डॉक्टर ऑफ साइंस (डीएससी) की मानद उपाधि प्रदान कर सम्मानित किया गया। उनके हाथों मेधावी विद्यार्थियों को मेडल भी पहनाए गए।


समारोह में संस्थान के कुल 2,048 विद्यार्थियों को विभिन्न पाठ्यक्रमों की उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें बीटेक के 1,106, इंटीग्रेटेड डुअल डिग्री के 385, एमटेक एवं एमफार्मा के 322, पीएचडी के 182, एमएससी के 39 और बीआर्क के 14 विद्यार्थी शामिल रहे। वहीं, शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए कुल 124 मेडल एवं पुरस्कार प्रदान किए गए। छात्रा हरजस कौर ने सर्वाधिक 15 मेडल हासिल कर विशेष उपलब्धि दर्ज की। उपाधि और मेडल प्राप्त करते समय विद्यार्थियों के चेहरे खुशी और गर्व से खिल उठे।

मुख्य अतिथि कुमार मंगलम बिड़ला ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए जीवन में अपने फैसले स्वयं लेने और जोखिम उठाने का साहस रखने की सीख दी। उन्होंने जेन-जी की लोकप्रिय फिल्मी पंच लाइनों के अंदाज में सफलता के तीन मंत्र दिए। उन्होंने समझाया कि बिना जोखिम उठाए बड़ी उपलब्धियां हासिल करना संभव नहीं है और जिंदगी की असली खूबसूरती उसके अनुभवों एवं उपलब्धियों में होती है।


इस अवसर पर बीएचयू के कार्यकारिणी परिषद के सदस्य एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री महेंद्र नाथ पांडेय ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय के विद्यार्थी के रूप में शैक्षणिक जीवन पूरा करने के बाद सामाजिक, राजनीतिक और अन्य क्षेत्रों में काम करते हुए महामना की परिकल्पना को आगे बढ़ाना सभी की जिम्मेदारी है।


उन्होंने कहा कि आईआईटी-बीएचयू के उत्कृष्ट शोध कार्यों और यहां से निकले प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों ने देश-दुनिया में अपनी पहचान बनाई है। वर्ष 1916 में महामना द्वारा देखी गई परिकल्पना आज साकार हो रही है और आगे भी होती रहेगी।

समारोह में संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी, प्राध्यापक, शिक्षाविद्, अभिभावक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। वर्षों की मेहनत के बाद उपाधि और पदक हासिल करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह अवसर उत्साह, गर्व और नई उम्मीदों से भरा रहा।

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