रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला के नौवें दिन श्रीराम के वन गमन, निषाद मिलन और लक्ष्मण के गीत उपदेश का अत्यंत भावुक एवं मार्मिक मंचन किया गया। लीला के दौरान अयोध्यावासियों का विलाप और प्रभु श्रीराम के वन जाने का प्रसंग देखकर रामलीला स्थल पर मौजूद श्रद्धालु भावुक हो उठे।नौवें दिन की लीला की शुरुआत माता कौशल्या के रनिवास से हुई। श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वन गमन का प्रसंग मंचित किया गया। अपने प्रिय श्रीराम को वन जाते देख अयोध्यावासियों के विलाप और भावनात्मक दृश्यों ने वातावरण को गमगीन कर दिया। इसके बाद श्रीराम की निषादराज से भेंट और लक्ष्मण के उपदेश से जुड़े प्रसंगों का भी मंचन हुआ।
रामनगर की इस पारंपरिक रामलीला की खास बात यह रही कि लीला देखने के लिए काशी राज परिवार के सदस्य राजसी अंदाज में हाथी पर सवार होकर पहुंचे। उनकी मौजूदगी ने रामलीला की ऐतिहासिक और पारंपरिक भव्यता को और खास बना दिया।
रामनगर की रामलीला अपनी सदियों पुरानी परंपरा, विशिष्ट मंचन शैली और जीवंत प्रसंगों के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। नौवें दिन श्रीराम के वन गमन का मंचन श्रद्धालुओं के लिए त्याग, मर्यादा और भक्ति का भावपूर्ण संदेश लेकर आया।


