वाराणसी में भारत-जापान के रिश्तों को लेकर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोनों देशों की बढ़ती साझेदारी पर बात की। उन्होंने कहा कि भारत और जापान के संबंध केवल आर्थिक साझेदारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विश्वास और आत्मीयता पर आधारित हैं। योगी ने बताया कि करीब 1400 जापानी कंपनियां भारत में काम कर रही हैं और दोनों देशों के बीच सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन हाइड्रोजन और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के ईडा क्षेत्र में 500 एकड़ में जापानी सिटी विकसित की जा रही है। इसके लिए इन्वेस्ट यूपी में यामानाशी डेस्क भी बनाया गया है। उन्होंने कहा कि जापान के पास तकनीक और अनुभव है, जबकि भारत के पास प्रतिभा और युवा शक्ति है। योगी ने इसी साल फरवरी की जापान यात्रा का जिक्र करते हुए बताया कि टोक्यो और यामानाशी में जापानी कंपनियों के साथ हजारों करोड़ रुपये के निवेश को लेकर समझौते हुए हैं।
कार्यक्रम में जापान की पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे अपने पति को याद कर भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि शिंजो आबे के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गहरे आत्मीय संबंध थे। वर्ष 2015 में काशी आने के बाद वह उन्हें गंगा आरती और वाराणसी की यादें सुनाते थे। अकी आबे ने रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर की डिजाइन की सराहना की। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी ने उन्हें वाराणसी की गुलाबी मीनाकारी से बना मोर का स्मृति चिह्न भेंट किया।


