वाराणसी में बुधवार को बंगाली समाज की महिलाओं ने पारंपरिक सिंदूर खेला की रस्म निभाकर मां दुर्गा को विदाई दी। शहर के विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों में महिलाएं एकत्र हुईं और मां को सिंदूर अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। बंगाली परंपरा में मां दुर्गा को बेटी के रूप में माना जाता है, जो मायके आने के बाद विजयादशमी पर अपने ससुराल लौटती हैं।
सिंदूर खेला की रस्म के बाद बंगाली समाज के लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मां दुर्गा के प्रतीकात्मक विसर्जन की परंपरा निभाई। इस दौरान महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाया और मां को अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना के साथ विदा किया। विदाई की रस्म में केले के पत्तों और फलों का भी इस्तेमाल किया गया, जबकि चावल फेंकने की परंपरा भी निभाई गई।
इस बार तिथि और पूजा-विधान के अनुसार वाराणसी में 21 अक्टूबर को मां दुर्गा की विदाई की रस्म निभाई जा रही है। पूजा पंडालों में महिलाओं की भागीदारी के साथ बंगाली समाज की सांस्कृतिक परंपराएं देखने को मिलीं। मान्यता के अनुसार, जिस तरह शादी के बाद बेटी मायके से विदा होकर ससुराल जाती है, उसी भाव के साथ मां दुर्गा को विदाई दी जाती है और अगले साल फिर आगमन की कामना की जाती है।


