लक्सा क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक लक्ष्मी कुंड पोखरा पर जीवित्पुत्रिका (जितिया) पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया। पुत्र की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और मंगलकामना को लेकर महिलाओं ने कठिन निर्जला व्रत रखा। बड़ी संख्या में महिलाएं लक्ष्मी कुंड सहित नगर के विभिन्न पोखरों पर पहुंचीं और जीवित्पुत्रिका माता का दर्शन-पूजन किया।
महिलाओं ने व्रत के दौरान जीवित्पुत्रिका माता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। पूजन में आठ प्रकार के फल-फूल, मिष्ठान और नए वस्त्र अर्पित किए गए। इसके साथ ही महिलाओं ने सामूहिक रूप से व्रत की कथा सुनी और अपने पुत्रों के सुखी, स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। पूजा के दौरान कुंड परिसर में भक्ति और श्रद्धा का माहौल बना रहा। जीवित्पुत्रिका व्रत को मातृत्व की आस्था, त्याग और संतान के प्रति समर्पण का पर्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान जीमूतवाहन की पूजा करने से संतान पर आने वाले संकट दूर होते हैं और उनके जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। इसी विश्वास के साथ माताएं करीब 24 घंटे या उससे अधिक समय तक अन्न-जल का त्याग कर कठिन निर्जला व्रत रखती हैं।
जीमूतवाहन से जुड़ी कथा में उनके त्याग और परोपकार का वर्णन मिलता है। मान्यता के अनुसार, उन्होंने नाग माता के पुत्र शंखचूड़ की रक्षा के लिए स्वयं को गरुड़ के सामने समर्पित कर दिया था। उनके त्याग से प्रभावित होकर गरुड़ ने नागों की बलि न लेने का वचन दिया। इसी धार्मिक मान्यता के चलते जीवित्पुत्रिका पर्व पर माताएं संतान की रक्षा और दीर्घायु की कामना से जीमूतवाहन की पूजा करती हैं।
लक्ष्मी कुंड पर भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी से चलने वाले प्रसिद्ध 16 दिवसीय सोरहिया मेले का समापन भी जीवित्पुत्रिका व्रत के पूजन के साथ हुआ। पर्व के अवसर पर कुंड और आसपास के क्षेत्रों में महिलाओं की भीड़ से माहौल भक्तिमय बना रहा। व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद किया जाएगा।


