विश्वप्रसिद्ध रामनगर की रामलीला में शनिवार को सीता हरण और प्रभु श्रीराम के विरह का मार्मिक प्रसंग प्रस्तुत किया गया। पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार आयोजित लीला में माता सीता के हरण के बाद प्रभु श्रीराम की व्याकुलता और उनकी खोज में वन-वन भटकने के प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
लीला के क्रम में शूर्पणखा प्रसंग और मारीच वध के बाद रावण द्वारा छलपूर्वक माता सीता का हरण किया गया। कुटिया में सीता जी को न पाकर प्रभु श्रीराम व्याकुल हो उठे और लक्ष्मण जी के साथ उनकी तलाश में निकल पड़े। इस दौरान जटायु से भेंट और उनके उद्धार का प्रसंग भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा।
रामनगर की रामलीला की पारंपरिक मर्यादा के अनुरूप मंचन बिना लाउडस्पीकर और आधुनिक डिजिटल माध्यमों के किया जाता है। लीला के दर्शन के लिए श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचे और रामकथा के प्रसंगों से भावनात्मक रूप से जुड़े रहे।परंपरा के अनुसार काशी नरेश महाराज अनंत नारायण सिंह भी अपनी शाही सवारी के साथ लीला स्थल पर पहुंचे। उनके आगमन पर श्रद्धालुओं ने ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष से वातावरण गुंजायमान कर दिया। रामनगर की सदियों पुरानी रामलीला में परंपरा, आस्था और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला।


