काशी की सैकड़ों साल साल पुरानी और विश्वप्रसिद्ध नाटी इमली की भरत मिलाप लीला इस बार 22 अक्टूबर, गुरुवार को आयोजित होगी। पंचांगों में तिथियों की गणना के अंतर के कारण परंपरागत रूप से विजयादशमी के अगले दिन होने वाली यह ऐतिहासिक लीला इस बार विजयादशमी के दो दिन बाद एकादशी तिथि पर संपन्न होगी। आयोजन को लेकर मेला समिति और प्रशासन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। मैदान की साफ-सफाई, रंगाई-पुताई और अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
श्रीचित्रकूट रामलीला समिति के व्यवस्थापक एवं मेला संरक्षक मुकुंद उपाध्याय ने बताया कि आश्विन शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी पापांकुशा एकादशी पर नाटी इमली की भरत मिलाप लीला आयोजित होती है। काशी के पंचांगों के अनुसार, इस बार एकादशी 22 अक्टूबर को पड़ रही है। इसी वजह से आयोजन की तारीख निर्धारित की गई है। तारीख में बदलाव के चलते श्रद्धालुओं को लीला के लिए एक दिन अतिरिक्त इंतजार करना होगा।
आयोजन में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए समिति और प्रशासन व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में जुटे हैं। अधिकारी समय-समय पर मौके पर पहुंचकर तैयारियों का निरीक्षण कर रहे हैं। समिति की ओर से भी व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी की जा रही है, ताकि आयोजन से पहले शेष कमियों को दूर किया जा सके।
मुकुंद उपाध्याय ने बताया कि कुछ स्थानों पर सड़कें अभी भी ऊबड़-खाबड़ हैं। बिजली व्यवस्था के साथ यातायात प्रबंधन भी बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि भगवान के रथों के आगमन के समय रास्तों पर आवागमन पूरी तरह प्रतिबंधित रहना चाहिए, क्योंकि गलियों से दोपहिया वाहनों के आने से लीला के दौरान व्यवधान उत्पन्न होने की आशंका रहती है। पुलिस प्रशासन और नगर निगम की ओर से भी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। समिति को उम्मीद है कि शेष समस्याओं का समय रहते समाधान कर लिया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो और काशी की इस ऐतिहासिक परंपरा का आयोजन सुचारु रूप से संपन्न हो सके।


