मुकिमगंज स्थित शंकर सरदार के बाड़े में चल रही श्रीराम कथा के छठवें दिन प्रभु श्रीराम की मनोहारी बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा व्यास पं. रविशंकर ठाकुर ने भगवान श्रीराम के बाल स्वरूप, उनकी सरलता, चंचलता और करुणामयी छवि का वर्णन करते हुए कहा कि प्रभु की बाल लीलाओं का स्मरण मनुष्य के अंत:करण को निर्मल करता है।
कथा के दौरान उन्होंने बताया कि बाल रूप में भगवान श्रीराम अपनी मुस्कान और भोली चितवन से माता कौशल्या सहित अयोध्यावासियों के हृदय में बस गए थे। उनकी प्रत्येक लीला में लोककल्याण और धर्म का संदेश निहित है। कथा प्रसंगों के साथ भक्ति गीतों और राम नाम के जयघोष से कथा स्थल भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु भगवान के बाल स्वरूप का भाव स्मरण कर भावविभोर नजर आए और देर तक जय श्रीराम के उद्घोष गूंजते रहे।
श्रीराम कथा में पूर्व एमएलसी डॉ. शिवनाथ यादव, इंजीनियर अशोक यादव, छति यादव, यादव धर्मशाला काशी के अध्यक्ष अशोक यादव, पार्षद राजेश यादव ‘चल्लू’, सीताराम यादव, पारस यादव ‘पप्पू’, गणेश केशरी, राकेश यादव, रजनी माता जी, प्रियंका माता जी, पद्मिनी माता जी, डॉ. निरंकारी प्रभु जी, डॉ. प्रभा रानी जी, दीपमाला, कुसुम यादव, नीतू यादव, मधु यादव, नंदनी यादव, अनीता यादव सहित हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे।


