वाराणसी के लमही स्थित सुभाष मंदिर में बुधवार को आजाद हिंद सरकार के स्थापना दिवस पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस को श्रद्धापूर्वक याद किया गया। सुबह से ही मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। लोगों ने नेताजी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर देश की आजादी के लिए उनके संघर्ष और बलिदान को नमन किया। 21 अक्टूबर 1943 को नेताजी ने सिंगापुर के कैथे हॉल में आजाद हिंद सरकार की स्थापना की थी।
काशी का सुभाष मंदिर अपनी विशेष पहचान के लिए जाना जाता है। यहां धर्म, जाति और वर्ग के भेदभाव से दूर लोग नेताजी के प्रति आस्था व्यक्त करने आते हैं। मंदिर में गर्भवती महिलाएं भी अपनी संतान के साहसी, पराक्रमी और देशभक्त बनने की कामना लेकर पहुंचती हैं। स्थापना दिवस पर श्रद्धालुओं ने नेताजी के आदर्शों को याद करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर विशाल भारत संस्थान की ओर से ‘द्वितीय विश्व युद्ध में आजाद हिंद सरकार की भूमिका एवं भारत की आजादी में योगदान’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. कविंद्र नारायण श्रीवास्तव ने दीप प्रज्वलित कर किया। संगोष्ठी में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) की शोध छात्राओं ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने आजाद हिंद फौज के सैन्य संघर्ष और देश की स्वतंत्रता में उसके योगदान पर विचार साझा किए।


