खोजवा शंकुलधारा पोखरे की स्थिति हुई दयनीय, सुध लेने वाला कोई नहीं

खोजवा स्थित प्रसिद्ध पोखरा संकुल धारा पोखरा की हालत इस समय बहुत ही दयनीय है। शहर के दक्षिणी क्षेत्र में यह प्रसिद्ध पौराणिक पोखरा स्थित है। जिसका वर्णन वेदों और पुराणों में मिलता है। परंतु आज यह अपने स्थिति पर आंसू बहा रहा है। बता दे की वर्ष 2017 में हृदय योजना के तहत इस पोखरे का काया कल्प कराया गया था। सबसे आश्चर्य की बात यह कि इसकी साज-सज्जा तो करा दी गयी परंतु इसके रखरखाव की दिशा में कोई प्रयास नहीं किया गया। हेरिटेज सिटी के अंतर्गत 18 लाख 83 हजार 701 रुपये खर्च किए गए थे। तब पोखरा देखने लायक बन पाया था। बता दे कितने रुपए खर्च करके इसमें फव्वारा भी लगाया गया था। 3 से 4 माह चलने के बाद यह फव्वारा शोपीस बन गया और कई सालों से नहीं चला है।

इसके नहीं चलने से संकुल धारा पोखरा का पानी भी हरा पड़ गया है तथा पानी की ऊपरी सतह पर काई साफ देखी जा सकती है।  अब तो स्थिति ऐसी बन गई है कि इस पोखरे के पानी से दुर्गंध भी उठने लगी है। योजना के तहत जो धनराशि आई थी उससे पोखरे का सुंदरीकरण के साथ ही स्ट्रीट लाइट लगाने का भी कार्य किया गया था। पोखरे के चारों तरफ 12 स्ट्रीट लाइट्स लगाई गई थीं जिनमें अब सिर्फ कुछ ही जलती हैं। शेष खराब होकर शो पीस का कार्य कर रही हैं। बता दे कि किसी संकुल धारा पोखरा में विभिन्न क्षेत्रों में स्थापित होने वाली मूर्तियों का विसर्जन भी जिला प्रशासन द्वारा कराया जाता है। जिसके साफ सफाई की पूरी जिम्मेदारी नगर निगम की होती है। परंतु नगर निगम कुछ मूर्तियों को निकालने के बाद बाकी उसी पोखरे में छोड़ देता है जो स्थानीय लोगों और राहगीरों के लिए समस्या का कारण बनता है।नगर निगम की अगर कार्यशैली देखनी है तो संकुल धारा पहुंच कर देखा जा सकता है यहां पर कहने को तो साफ सफाई का जिम्मा नगर निगम को दिया गया है परंतु अभी भी इस पोखरे में विसर्जित मूर्तियों के अवशेष पड़े हैं इसे दूर से भी देखा जा सकता है।यहीं नहीं इससे भी खराब स्थिति पोखरे के चारों तरफ 12 की ही संख्या में लगाई गई हेरिटेज लुक वाली लाइट्स की है। सभी हेरिटेज लाइट्स खराब हो चुकी है। उनसे जमीन में कभी-कभी करंट उतरने की भी शिकायतें आती रहती है। इन लाइट्स के न जलने से पोखरे के चारों तरफ अंधेरा फैला रहता है। इससे यह स्थान जुआरियों व शराबियों का आश्रय स्थल बना हुआ है। आए दिन मछलियां मरने की सूचना प्राप्त होती रहती है। मछली मरने का मुख्य कारण इस पोखरे की साफ-सफाई नहीं होना होता है।

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