काशी का सुप्रसिद्ध जगन्नाथ रथयात्रा मेला मंगलवार की सुबह की पहली किरण के साथ मंगला आरती के बाद शुरू हो गया। पुजारी ने भगवान् जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की महाआरती की । इस दौरान पूरा मेला परिक्षेत्र भगवान जगन्नाथ के जयकारों हर-हर महादेव के उद्घोष सहित घंट घड़ियाल डमरु की ध्वनि से गुंजायमान हो उठा। प्रभु के भक्तों के बीच में आकर दर्शन देने से प्रसन्न भक्त नाचते झूमते नजर आए । प्रभु की महा आरती के बाद रथ का पट खोला गया । पट खुलते ही लोगों की भीड़ प्रभु के दर्शन हेतु उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने प्रभु को विशेष रूप से तुलसी दल की माला फल फूल मिष्ठान इत्यादि अर्पित कर उनसे जीवन मंगल की कामना की । रथा रुढ़ भगवान जगन्नाथ श्रद्धालुओं को दर्शन दे रहे हैं। आपको बता दें कि साल 1802 में काशी में शुरू हुए इस मेले का यह 221वां वर्ष है। पूरा मेला परिसर भगवान् जगन्नाथ के जयकारे से गूज रहा है।
काशी के लक्खा मेले में शुमार तीन दिवसीय रथयात्रा मेले का शुभारम्भ हो गया है। भक्त देर रात से ही भगवान जगन्नाथ के दर्शन को आतुर दिखे। परंपरागत तरीके से बेनी के बगीचे में आधी रात भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की मंगला आरती की गई। इसके बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमा को रथ पर विराजमान किया गया। यहां भी महाआरती के बाद रथयात्रा मेला शुरू हो गया।
मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष दीपक शापुरी ने बताया कि जगन्नाथ पुरी को छोड़कर आए वहां के मुख्य पुजारी तेजोनिधि ब्रह्मचारी ने 1790 में काशी में जगन्नाथ मंदिर का निर्माण करवाया। इसके 12 साल बाद रथ यात्रा मेले की शुरुआत कराई थी। 1802 में शुरू हुए रथयात्रा मेले का यह 221वां वर्ष है। इस मेले में पूर्वांचल सहित बिहार के श्रद्धालु आते हैं। हर दिन, हर समय यहां तीन दिनों तक लाखों श्रद्धालु की भीड़ होती है।वही पूरा क्षेत्र सुबह से ही गुलजार रहा विशेष रुप से नानखटाई की दुकानें सजी रही। इसके साथ ही चरखी झूले खाने पीने के सामान खिलौने की दुकानों पर भी खूब भीड़ रही।

