उत्तर है बिजली विभाग ने सरकार को बदनाम करने की सुपारी ले के ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा आज अपने पुराने सख्त तेवरों में नजर आए। उन्होंने लखनऊ में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान UPPCL चेयरमैन से लेकर राज्यभर के एक्सियन (अवर अभियंताओं) तक को जमकर फटकार लगाई। यह बैठक बिजली व्यवस्था की बदहाली, बिलिंग अनियमितताओं और जन शिकायतों के बढ़ते मामलों को लेकर बुलाई गई थी। बैठक के दौरान मंत्री ने पहले अधिकारियों को दस मिनट तक ध्यान से सुना, लेकिन इसके बाद जो कुछ कहा, उसने पूरे बिजली विभाग को हिला कर रख दिया। उनकी साफ चेतावनी थी कि अब लापरवाही और मनमानी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मैं आपकी बकवास सुनने के लिए नहीं बैठा हूं। नीचे की ज़मीनी हकीकत कुछ और ही है।
बिजली विभाग कोई बनिया की दुकान नहीं है जो सिर्फ वसूली करे, यह जन सेवा का विभाग है।कंप्यूटर के जमाने में जब एक आम आदमी का 72 करोड़ का बिल आता है, तो फिर उसे ठीक करने के नाम पर रिश्वत ली जाती है।गलत जगह विजिलेंस के छापे पड़ते हैं, असली बिजली चोरी करने वालों तक कोई नहीं पहुंचता। FIR के नाम पर पैसे वसूले जा रहे हैं।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब सब कुछ लिखित रूप में दर्ज होगा, क्योंकि मौखिक आदेशों को अधिकारी नजरअंदाज कर देते हैं।मंत्री ने संविदा कर्मियों की मनमानी छंटनी, फोन कॉल्स न उठाना, और विद्युत दुर्घटनाओं को लेकर भी अधिकारियों को फटकारा। उन्होंने चेतावनी दी मैं जनता के प्रति जवाबदेह हूं।बैठक का समापन इस कड़ी चेतावनी के साथ हुआ कि यदि अब भी सुधार नहीं हुआ तो आगे और कठोर कदम उठाए जाएंगे।मंत्री के इस तेवर को देखकर विभागीय अधिकारी सकते में हैं और अब बड़े बदलाव की आशंका जताई जा रही है।
