वाराणसी को स्वच्छता सर्वेक्षण में शीर्ष पर लाने की तैयारी, 1 सितम्बर से बड़े बदलाव

वाराणसी में अब सफाई व्यवस्था होगी और भी सख्त। 1 सितंबर से शहर में रोजाना तीन बार सफाई की जाएगी और नगर निगम की टीम घर-घर जाकर लोगों को कचरा अलग करने के लिए जागरूक करेगी।महापौर अशोक कुमार तिवारी ने मंगलवार को स्मार्ट सिटी सभागार में नगर आयुक्त अक्षत वर्मा और विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में पेयजल और सीवरेज की समस्याओं से लेकर कूड़ा प्रबंधन और वृक्षारोपण तक कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।महापौर ने पाया कि नवविस्तारित वार्डों में कई ओवरहेड टैंकों का कनेक्शन अब तक नहीं जोड़ा गया है और 18 वार्डों की पेयजल पाइपलाइन से जुड़ी डीपीआर शासन को नहीं भेजी गई। रोहनिया विधानसभा की सीवरेज डीपीआर पर भी स्पष्ट जवाब न मिलने पर उन्होंने नाराजगी जताई और कड़े निर्देश दिए।"महापौर ने जल निगम को आदेश दिया कि 23 अगस्त तक पेयजल डीपीआर शासन को भेज दी जाए और 15 सितम्बर तक सीवरेज डीपीआर तैयार कर शासन को प्रेषित की जाए। 

साथ ही मणिकर्णिका घाट और नमो घाट स्थित सीवेज पम्पिंग स्टेशनों को पूरी क्षमता से चलाने के निर्देश भी दिए, ताकि घाट क्षेत्र में सीवर ओवरफ्लो की समस्या न हो।बैठक में घर-घर कूड़ा उठान की समीक्षा भी की गई। महापौर ने साफ कहा कि स्वच्छता अभियान नगर निगम की प्राथमिकता है। 1 सितंबर से वे खुद नगर आयुक्त और अधिकारियों के साथ वार्डों का दौरा करेंगे। इस दौरान लोगों को गीला और सूखा कचरा अलग-अलग देने के लिए प्रेरित किया जाएगा।वहीं वृक्षारोपण अभियान पर संयुक्त नगर आयुक्त कृष्ण चन्द्र ने बताया कि अब तक 5852 पेड़ लगाए जा चुके हैं। महापौर ने 15 सितम्बर तक 20 हजार पेड़ लगाने और सभी का जियो-टैग कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण से शहर न केवल हरा-भरा होगा बल्कि पर्यावरण संतुलन भी मजबूत होगा।बैठक में नगर आयुक्त अक्षत वर्मा समेत तमाम विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। महापौर ने स्पष्ट कहा कि स्वच्छता सर्वेक्षण में वाराणसी को शीर्ष स्थान दिलाने के लिए यह कदम बेहद अहम है।

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