काशी में मां अन्नपूर्णा के दरबार में उमड़ा भक्तों का सैलाब, माता के दर्शन से दूर होती है अन्न और धन की कमी

शारदीय नवरात्रि के आठवें दिन मां अन्नपूर्णा देवी की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। काशी में स्थित अन्नपूर्णा मंदिर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। श्रद्धालु माता के दर्शन और परिक्रमा के लिए उत्साहपूर्वक पहुंचे और बड़ी श्रद्धा एवं आस्था के साथ पूजन-अर्चन किया। 

मान्यता है कि माता अन्नपूर्णा भक्तों को अन्न, धन और वैभव का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। मंदिर के पुजारी अर्जुन पांडेय ने बताया कि मां अन्नपूर्णा देवी पार्वती का ही अन्नदान करने वाला स्वरूप हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, जब धरती पर भयंकर अकाल पड़ा और अन्न-जल का संकट गहराया, तब भगवान शिव ने मां अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगी।

उस समय देवी ने स्वयं प्रकट होकर भगवान शिव को अन्न दान दिया और यह वचन दिया कि काशी में कोई भी भूखा नहीं रहेगा। इसी घटना के बाद से काशी में मां अन्नपूर्णा की पूजा का महत्व और भी बढ़ गया। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, काशी में मां अन्नपूर्णा को भवानी देवी के नाम से भी जाना जाता है। भक्तों का विश्वास है कि उनकी आराधना से जीवन में कभी अन्न और धन की कमी नहीं होती।

मां अन्नपूर्णा को उदारता और पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। उनकी कृपा से जहां भौतिक संपदा की प्राप्ति होती है, वहीं आध्यात्मिक संतोष और जीवन में स्थिरता भी मिलती है। हर साल नवरात्रि की अष्टमी पर काशीवासियों के साथ-साथ दूर-दराज़ से आने वाले हजारों श्रद्धालु मां अन्नपूर्णा के मंदिर पहुंचते हैं। भक्त यहां परिक्रमा कर समृद्धि, सुख-शांति और परिवार के कल्याण की कामना करते हैं। इस मौके पर मंदिर परिसर में पूरा वातावरण भक्ति और श्रद्धा से सराबोर हो जाता है और भक्तजन माता के चरणों में नतमस्तक होकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

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