बाल नाट्य महोत्सव में बच्चों ने अभिनय से जीता दर्शकों का दिल

नागरी नाटक मंडली में आयोजित बाल नाट्य महोत्सव के दूसरे दिन बच्चों ने अपनी प्रतिभा, लगन और परिश्रम से मंच पर ऐसा रंग जमाया कि सभागार तालियों से गूंज उठा। बच्चों, अभिभावकों और रंगकर्मियों से खचाखच भरे सभागार में शनिवार को तीन नाटकों का मंचन हुआ, जिनमें दो नाटक मुंशी प्रेमचंद और फणीश्वर नाथ रेणु की प्रसिद्ध कहानियों पर आधारित थे।महोत्सव की दूसरी संध्या का पहला नाटक ‘गणित देश’ रहा, जिसे रेखा जैन ने लिखा और निर्देशन सुमन पाठक ने किया। इस अनोखी प्रस्तुति में बच्चों ने अंकों का रूप धारण कर गणित से भागने वाले एक बच्चे को उसकी अहमियत समझाई। नाटक के अंत में बच्चा गणित के प्रति अपनी झिझक छोड़कर उससे प्रेम करना सीखता है। दर्शकों ने बच्चों की ऊर्जा और संदेशपूर्ण अभिनय की खूब सराहना की।

दूसरी प्रस्तुति फणीश्वर नाथ रेणु की मशहूर कहानी ‘पंचलाइट’ पर आधारित रही, जिसे द लिटिल मून एकेडमी के बच्चों ने जीवंत किया। बच्चों ने गांव के अंधकार और उजाले, अहंकार और स्वीकार, तिरस्कार और प्रेम के भावों को मंच पर बखूबी उभारा। छोटे कलाकारों ने हास्य, भावनाओं और फिल्मी गीतों के मेल से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।तीसरे नाटक ‘हीरा और मोती’ का मंचन दिल्ली पब्लिक स्कूल के बच्चों ने किया। कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की इस प्रसिद्ध कहानी का निर्देशन सूरज प्रताप सिंह ने किया। बच्चों ने झूरी, मालिकन, गया, हीरा-मोती और स्वयं मुंशी प्रेमचंद की भूमिकाओं को प्रभावशाली ढंग से निभाते हुए कहानी को अनूठा रूप दिया।रंगमंच प्रेमियों के लिए यह संध्या यादगार रही। महोत्सव के अंतिम दिन रविवार को दो नाटकों का मंचन किया जाएगा।



Post a Comment

Previous Post Next Post