काशी हिंदू विश्वविद्यालय के दृश्य कला संकाय की अहिवासी कला दीर्घा में अहमदाबाद (गुजरात) के वरिष्ठ छायाकार मनन ठाकर की “चेहरों के दर्पण में प्रकट हुई जिंदगी” विषय पर एकल फोटो प्रदर्शनी का शुभारंभ किया गया। प्रदर्शनी में देशभर के मेलों, त्योहारों और विविध जीवन परिस्थितियों में खींचे गए 30 से अधिक प्रभावशाली व्यक्ति-छायाचित्र (पोर्ट्रेट) प्रदर्शित किए गए हैं।मनन ठाकर ने अपने कैमरे के माध्यम से जीवन के अनगिनत मनोभावों को बड़े ही सूक्ष्म और भावपूर्ण तरीके से कैद किया है। कहीं किसी बुजुर्ग की आंखों में जीवन के अनुभवों की चमक दिखती है, तो कहीं युवा की आंखों में भविष्य के सपने। बच्चों के चेहरे पर मासूम चंचलता नजर आती है, वहीं एक वृद्धा की छवि में बुढ़ापे का सन्नाटा स्पष्ट महसूस होता है।
यह प्रदर्शनी मानव जीवन के विविध रंगों की एक सजीव झांकी प्रस्तुत करती है, जिसे दर्शक गहराई से महसूस कर सकते हैं।प्रदर्शनी का उद्घाटन दृश्य कला संकाय की संकाय प्रमुख प्रो. उत्तमा दीक्षित, ख्यात शल्य चिकित्सक, कलाकार एवं फोटोग्राफर डॉ. गौतम चक्रवर्ती तथा वरिष्ठ छायाकार बिनय रावल द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। कला दीर्घा के संयोजक डॉ. सुरेश जांगिड़ ने प्रदर्शनी का परिचय प्रस्तुत किया।इस अवसर पर दृश्य कला संकाय के वरिष्ठ सदस्य, चित्रकला विभागाध्यक्ष प्रो. जसमिंदर कौर, व्यवहारिक कला विभागाध्यक्ष प्रो. मनीष अरोड़ा, मूर्तिकला विभागाध्यक्ष प्रो. ब्रह्म स्वरूप, सुरेश नायर, डॉ. आशीष गुप्ता, डॉ. ललित मोहन सोनी सहित बड़ी संख्या में कला प्रेमी, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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