दिल्ली में आवारा कुत्तों की गिनती को लेकर सियासी और शैक्षणिक घमासान

दिल्ली में आवारा कुत्तों की गिनती के लिए सरकारी और निजी स्कूलों के शिक्षकों की तैनाती से जुड़ा मामला तूल पकड़ता जा रहा है। शिक्षा निदेशालय के कथित निर्देश के बाद शिक्षक संगठनों में भारी नाराज़गी देखने को मिल रही है। संगठनों का कहना है कि गैर-शैक्षणिक कार्यों में शिक्षकों की ड्यूटी लगाने से न सिर्फ छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होगी, बल्कि शिक्षण पेशे की गरिमा पर भी सवाल खड़े होंगे।


शिक्षक संगठनों ने स्पष्ट किया है कि शिक्षकों पर पहले से ही पढ़ाई, प्रशासनिक कार्य और अन्य जिम्मेदारियों का बोझ है। ऐसे में आवारा कुत्तों की निगरानी या गिनती जैसी जिम्मेदारी देना पूरी तरह अनुचित है। उनका आरोप है कि इस तरह के आदेश शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करते हैं और शिक्षकों का मूल कार्य—शिक्षण—प्रभावित होता है।हालांकि, दिल्ली सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। सरकार के सूत्रों का कहना है कि आवारा कुत्तों की गिनती के लिए शिक्षकों की तैनाती से जुड़ा कोई आदेश जारी नहीं किया गया है।

सरकार ने साफ किया है कि स्कूलों में छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केवल एक शिक्षक को नोडल अधिकारी के रूप में नामित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि स्कूल परिसर में आवारा कुत्तों से बच्चों को सुरक्षित रखा जा सके।इस मुद्दे पर शिक्षक संगठनों और सरकार के बीच बयानबाज़ी जारी है। फिलहाल शिक्षक संगठनों की मांग है कि शिक्षकों को किसी भी तरह के गैर-शैक्षणिक कार्यों से दूर रखा जाए और शिक्षा व्यवस्था पर पूरा ध्यान दिया जाए।



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