रविदास जयंती पर काशी में उमड़ेगा रैदासियों का महासंगम, 10 देशों से पहुंचेंगे संत

वाराणसी में 1 फरवरी को संत रविदास जयंती के अवसर पर रैदासियों का भव्य जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस अवसर पर भारत सहित दुनिया के 10 देशों से रैदासी संत संत रविदास का आशीर्वाद लेने के लिए काशी पहुंचेंगे। करीब पांच किलोमीटर के दायरे में लगने वाले इस विशाल जन्मोत्सव की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं।सीर गोवर्धनपुर स्थित संत रविदास जन्मस्थली क्षेत्र में मेले का रंग चढ़ने लगा है। दूर-दराज से रैदासी श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचने लगे हैं। रैदासियों की सेवा के लिए पंजाब से 500 से अधिक सेवादारों का पहला जत्था बनारस पहुंच चुका है। वहीं, आयोजन स्थल पर भव्य तैयारियां अंतिम चरण में हैं।श्रीगुरु रविदास जन्म स्थान पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट के ट्रस्टी केएल सरोवा ने बताया कि संत रविदास के प्राकट्योत्सव के अवसर पर इस बार 10 दिनों तक धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

रविदास मंदिर से लेकर सीर गोवर्धनपुर तक पूरा इलाका मेले में तब्दील हो जाएगा।केएल सरोवा के अनुसार, आयोजन को लेकर तीन ट्रक गेहूं, चावल और अन्य खाद्य सामग्री काशी पहुंच चुकी है। लगभग 50 हजार श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था की गई है, जबकि इस वर्ष 2 लाख से अधिक रैदासी श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।सभा स्थल पर जर्मन हैंगर टेंट लगाया जा रहा है, जो 300 फीट लंबा और 100 फीट चौड़ा होगा। इसके अलावा मैदान के सामने करीब 100 अतिरिक्त टेंट तैयार किए गए हैं। अलग-अलग राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अलग टेंट बनाए गए हैं। लंगर, भंडारण और सेवा कार्यों के लिए भी विशेष टेंट लगाए गए हैं।ट्रस्ट के प्रमुख संत निरंजन दास महाराज 30 जनवरी को काशी पहुंचेंगे। उनके साथ विदेशों से आए एनआरआई श्रद्धालु भी शामिल होंगे।

इस अवसर पर ट्रस्ट की ओर से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री समेत सभी राजनीतिक दलों के प्रमुख नेताओं को भी आमंत्रण भेजा गया है।संत रविदास मंदिर का ऐतिहासिक सफर भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। जून 1965 में मंदिर की नींव की पहली ईंट रखी गई थी। फरवरी 1974 में संत रविदास की मूर्ति स्थापित की गई। 7 अप्रैल 1994 को कांशीराम ने मंदिर पर पहला स्वर्ण कलश स्थापित कराया। वर्ष 2008 में पंजाब से स्वर्ण पालकी काशी लाई गई, जिसका लोकार्पण तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने किया था। वहीं, 30 जनवरी 2010 को काशी से रविदासिया धर्म की स्थापना हुई और अमृतवाणी का ऐलान किया गया।फिलहाल रविदास जयंती को लेकर काशी में उत्सव और श्रद्धा का माहौल है। प्रशासन और ट्रस्ट की ओर से सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं।



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