परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के द्वितीय समाधि दिवस के अवसर पर काशी के भेलूपुर में त्रि-दिवसीय भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। माघ शुक्ल नवमी को धर्म और विद्या की नगरी काशी में भगवान जैन पार्श्वनाथ की जन्मस्थली पर यह आयोजन सम्पन्न हुआ।कार्यक्रम की शुरुआत परमपूज्य निर्यापक वात्सल्य मूर्ति के स्वागत और मंगल सानिध्य से हुई। इस अवसर पर मुनिश्री समता सागरजी महाराज, मुनिश्री पूज्य सागरजी महाराज, मुनिश्री पर्वतसागरजी महाराज, एल्क श्री निज़ानंद सागरजी महाराज, क्षुल्लकजी महाराज, आर्यिका संघ, परमपूज्य गुरुमति माताजी, दृढ़मति माताजी और गुड़मती माताजी सहित समस्त मुनि संघ एवं आर्यिका संघ उपस्थित रहे।विनयांजलि सभा की मुख्य अतिथि के रूप में सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति श्री बिहारी लाल शर्मा उपस्थित रहे।
सारस्वत अतिथि और संस्कृत के वरिष्ठ विद्वान प्रोफेसर जानकी प्रसाद द्विवेदी तथा विशिष्ट अतिथि रेलवे के DRM माननीय आशीष जैन भी समारोह में शामिल हुए।इस अवसर पर दिगंबर जैन समाज के गणमान्य नेता और समाजसेवी उपस्थित रहे, जिनमें अध्यक्ष RC जैन, संजय जैन, विनोद जैन, राकेश जैन, सौरभ जैन, किशोर जैन, सुधीर पोद्दार, पवन जैन, श्री विजय कुमार जैन, प्रो फूलचंद्र जैन, प्रेमी प्रो कमलेश कुमार जैन, सुरेंद्र कुमार जैन, डॉ मुन्नी पुष्पा जैन, प्रमिला सांवरिया, वीणा जैन, स्नेहलता जैन, राजुल बगड़ा, रूबी, किरण, नेहा जैन, डॉ रानी जैन शामिल थे।विनयांजलि सभा का संचालन डॉ अमित कुमार जैन ने किया, जबकि स्वागत भाषण आर सी जैन द्वारा प्रस्तुत किया गया।
इस अवसर पर श्री विजय कुमार जी जैन द्वारा आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज पर आधारित 211 विशेष आवरण और टिकट संग्रह को एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया गया, जिसका विमोचन मुख्य अतिथि द्वारा किया गया।कार्यक्रम में उपस्थित सभी भक्तों ने धर्म लाभ प्राप्त किया और आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज की शिक्षाओं तथा जैन धर्म के मूल्यों के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की। आयोजन धार्मिक, सांस्कृतिक और विद्वत्तापूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

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