कोडिन कफ सिरप की तस्करी के काले साम्राज्य को ध्वस्त करने में जुटी वाराणसी पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने गिरोह के सरगना शुभम जायसवाल के सबसे करीबी और अहम सहयोगी विकास सिंह नरवे को नेपाल सीमा से सटे सिद्धार्थनगर जिले से गिरफ्तार किया है। विकास लंबे समय से फरार चल रहा था और उसकी तलाश में वाराणसी पुलिस की विशेष टीम कई दिनों से लगातार दबिश दे रही थी।पुलिस के अनुसार, सर्विलांस और मुखबिर की सटीक सूचना के आधार पर टीम ने नेपाल सीमा के पास से विकास को दबोच लिया। जांच में सामने आया है कि विकास सिंह नरवे न केवल शुभम जायसवाल का सबसे विश्वासपात्र सहयोगी था, बल्कि पूरे कफ सिरप तस्करी नेटवर्क का मुख्य रणनीतिकार भी माना जाता है।
पुलिस की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि विकास सिंह नरवे ने ही शुभम जायसवाल को बड़े तस्करों अमित टाटा और एसटीएफ के बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह से मिलवाया था। इन्हीं संपर्कों के बाद शुभम जायसवाल का तस्करी नेटवर्क उत्तर प्रदेश से निकलकर बिहार और पश्चिम बंगाल तक फैल गया। विकास इन सभी बड़े खिलाड़ियों के बीच समन्वय स्थापित करने की अहम भूमिका निभा रहा था।विकास सिंह नरवे का आपराधिक इतिहास भी काफी लंबा है। उस पर वाराणसी, जौनपुर, आजमगढ़ समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों में नशीली दवाओं की तस्करी और अवैध कारोबार से जुड़े दर्जनों मुकदमे दर्ज हैं। वह काफी समय से पुलिस की रडार पर था और गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था।
पुलिस का मानना है कि विकास की गिरफ्तारी के बाद कफ सिरप तस्करी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े कई बड़े राज सामने आ सकते हैं। आशंका जताई जा रही है कि यह गिरोह उत्तर प्रदेश और बिहार के साथ-साथ नेपाल और बांग्लादेश की सीमाओं तक नशीली दवाओं की खेप पहुंचा रहा था। पूछताछ में कई अन्य बड़े नामों और सफेदपोशों के भी बेनकाब होने की संभावना है।फिलहाल पुलिस विकास सिंह नरवे से गहन पूछताछ कर रही है और तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में छापेमारी तेज कर दी गई है।

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