दिल्ली के पश्चिमी जिले की साइबर थाना पुलिस ने साइबर क्राइम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए फास्टैग और अमेजन गिफ्ट कार्ड के जरिए किए जा रहे एक नए और एडवांस साइबर फ्रॉड का खुलासा किया है। पुलिस ने अंतर्राज्यीय साइबर ठगी सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी बड़े पैमाने पर ऑनलाइन ठगी में शामिल बताए जा रहे हैं।डीसीपी (वेस्ट) दराडे शरद भास्कर ने बताया कि साइबर थाना वेस्ट में एक शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें शिकायतकर्ता ने बताया कि उसे वॉट्सऐप पर ई-चालान से जुड़ा एक मैसेज मिला था। इस मैसेज में एक APK फाइल थी, जिसे खोलते ही उसका मोबाइल फोन हैक हो गया। इसके बाद उसके क्रेडिट कार्ड से एक लाख रुपये से अधिक की रकम धोखे से निकाल ली गई। ठगी की रकम एक लाख रुपये से ज्यादा होने के कारण शिकायत स्वतः ई-एफआईआर में तब्दील हो गई और जांच शुरू की गई।जांच में सामने आया कि ठगी की गई रकम का पहले फास्टैग पेमेंट के लिए इस्तेमाल किया गया और बाद में उसे अमेजन गिफ्ट कार्ड में बदल दिया गया।
यह राशि IDFC बैंक के एक पूल अकाउंट में जमा की गई थी, जिससे कई फास्टैग जुड़े हुए थे।आगे की टेक्निकल जांच, वाहन स्वामित्व सत्यापन और डिजिटल सबूतों के आधार पर पुलिस को पता चला कि यह पूरा साइबर फ्रॉड ऑपरेशन राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के घड़साना क्षेत्र से संचालित किया जा रहा था इसके बाद पुलिस की एक विशेष टीम गठित कर घड़साना में छापेमारी की गई। छापेमारी के दौरान “बंसरी कंपनी” के नाम से चल रही एक फर्म का पता चला, जहां पूरी तरह से तैयार साइबर फ्रॉड सेटअप मिला। मौके से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों की पहचान 29 वर्षीय घनश्याम उर्फ जीबी बॉस उर्फ सोनू और 27 वर्षीय नरेश कुमार उर्फ कालू के रूप में हुई है। दोनों ही आरोपी श्रीगंगानगर जिले के निवासी हैं।पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी घनश्याम पढ़ा-लिखा है और उसने बीएससी और एमबीए की पढ़ाई की है, जबकि नरेश कुमार 12वीं पास है। पूछताछ में घनश्याम ने बताया कि उसने बंसरी ब्रदर्स एंड वेंचर्स नाम से एक फर्म खोली थी, जो शुरुआत में बिजली बिल समेत अन्य बिल भुगतान के लिए ई-मित्र सेवाओं से जुड़ी थी और इससे उसे कमीशन मिलता था।
लेकिन मुनाफा कम होने के कारण उसने साइबर ठगी के लिए अपने बैंक खातों के दुरुपयोग की योजना बनाई।आरोपियों ने अपने खातों में ठगी की रकम मंगवाई, जिसे अलग-अलग वाहनों पर जारी फास्टैग के जरिए ट्रांसफर किया जाता था। इसके बाद फास्टैग बैलेंस का इस्तेमाल अमेजन गिफ्ट कार्ड खरीदने में किया गया, जिससे ठगी की रकम को वैध दिखाया जाता था।पुलिस को रिकॉर्ड की जांच में यह भी पता चला है कि अलग-अलग राज्यों से कई शिकायतें आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए बैंक खातों और मोबाइल नंबरों से जुड़ी हुई हैं, जो उनके संगठित और बड़े पैमाने पर साइबर धोखाधड़ी में शामिल होने की पुष्टि करती हैं।गिरफ्तारी और तलाशी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 10 लैपटॉप, 70 मोबाइल फोन, 450 से अधिक सिम कार्ड और 37 एटीएम कार्ड बरामद किए हैं। फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

.jpeg)
