शहर में रोजाना निकलने वाले कूड़े के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए वाराणसी नगर निगम ने वाराणसी वेस्ट सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड से करार किया था। इसके तहत सभी घरों में क्यूआर कोड लगाकर डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन की व्यवस्था लागू की गई। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। आज भी शहर की सड़कों और गलियों में कूड़े के ढेर दिखाई देते हैं, जबकि नगर निगम लगातार डोर-टू-डोर कलेक्शन का दावा कर रहा है।
सदन में उठा मामला, 21 करोड़ के भुगतान पर सवाल
हाल ही में नगर निगम की साधारण सभा में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन को लेकर गंभीर सवाल उठे। वार्ड नंबर-46 पहाड़िया से पार्षद और कार्यकारिणी सदस्य राजकपूर चौधरी ने इस व्यवस्था पर प्रश्न किया।उन्होंने बताया कि सलारपुरा वार्ड के पार्षद हनुमान प्रसाद ने सदन में जानकारी मांगी थी कि वाराणसी वेस्ट सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड को क्यूआर कोड स्कैनिंग के आधार पर भुगतान किया जाता है, जबकि इस मद में करीब 21 करोड़ रुपये का बजट सामने आया है।
जमीन पर नहीं दिख रही डोर-टू-डोर व्यवस्था
दैनिक भास्कर ने डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन की हकीकत जानने के लिए पार्षदों और स्थानीय लोगों से बातचीत की।जैतपुरा निवासी आकाश यादव ने बताया,“हमारे घर पर क्यूआर कोड पिछले साल गर्मी में लगाया गया था, लेकिन न तो कोई कर्मचारी स्कैन करने आया और न ही कूड़ा लेने। डोर-टू-डोर कलेक्शन क्या होता है, हमें नहीं पता। हम आज भी सड़क पर ही कूड़ा फेंकते हैं। दिवाली की पेंटिंग में क्यूआर कोड हट गया, लेकिन किसी ने उसकी सुध तक नहीं ली।”राजपुरा निवासी किशन मौर्या ने भी यही स्थिति बताई।“हमारे यहां भी क्यूआर कोड लगा था, लेकिन कभी स्कैन नहीं हुआ। कोई कूड़ा लेने नहीं आता। सड़क पर कूड़ा डाल देते हैं, वहीं से उठ जाता है। डोर-टू-डोर व्यवस्था सिर्फ कागजों में है।”
40 प्रतिशत घरों से ही उठ रहा कूड़ा : पार्षद
प्रह्लाद घाट वार्ड के पार्षद अभिजीत भरद्वाज ‘लकी’ ने व्यवस्था को पूरी तरह निंदनीय बताया।उन्होंने कहा,“वाराणसी वेस्ट सॉल्यूशन कोई ठोस काम नहीं कर रही। मेरे वार्ड में सिर्फ 40 प्रतिशत घरों से ही कूड़ा उठाया जा रहा है, बाकी 60 प्रतिशत घरों से नहीं। इसी वजह से लोग मजबूरन सड़कों और गलियों में कूड़ा फेंक रहे हैं।”
शिकायतों के बाद भी नहीं निकला समाधान
अभिजीत भरद्वाज ने बताया कि कई पार्षदों ने मिलकर नगर निगम और महापौर को पत्र दिया, यहां तक कि लखनऊ तक शिकायत भेजी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।उन्होंने कहा,“क्यूआर स्कैनिंग के नाम पर भुगतान किया जा रहा है, लेकिन मेरे वार्ड में कहीं क्यूआर कोड तक नहीं लगे हैं। इसमें बड़ी धांधली हो रही है। कूड़ा उठान सुनिश्चित होने के बाद ही भुगतान होना चाहिए।”
पार्टी की छवि पर पड़ रहा असर
भाजपा पार्षद अभिजीत भरद्वाज ने चिंता जताते हुए कहा,“कूड़ा नहीं उठता तो जनता पार्षद को दोषी मानती है। पार्षद भाजपा का है तो पार्टी की छवि भी खराब हो रही है। ऊपर से मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री स्वच्छता को लेकर काम कर रहे हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर हालात उलट हैं।”
सिर्फ 30-40 प्रतिशत घरों में हो रहा कलेक्शन
वार्ड नंबर-63 के पूर्व पार्षद और वर्तमान पार्षद पति हाजी वकास अंसारी ने कहा,“नगर निगम में पहले भी कई कंपनियां आईं और चली गईं। सभी ने पैसा लिया, काम नहीं किया। मौजूदा कंपनी भी सिर्फ 30 से 40 प्रतिशत घरों से ही कूड़ा उठा रही है। कभी 28 करोड़ तो कभी 21 करोड़ रुपये दिए जा रहे हैं, जिससे नगर निगम के राजस्व को नुकसान हो रहा है।”

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