लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा निर्मित पावन मणिकर्णिका घाट में हुई तोड़-फोड़ के विरोध में पाल विकास समिति, वाराणसी के तत्वावधान में पाल-बघेल-धनगर समाज ने विरोध प्रदर्शन किया और जिलाधिकारी वाराणसी के प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपा।इस दौरान समाज के रामाश्रय पाल ने कहा कि मणिकर्णिका घाट लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर है। जनकल्याण के उद्देश्य से निर्मित इस घाट के स्वरूप से छेड़छाड़ समाज की आस्था और इतिहास पर आघात है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
समाज की ओर से प्रशासन से मांग की गई कि मणिकर्णिका घाट से विस्थापित लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा को पुनः उसी स्थान पर भव्य एवं सम्मानजनक ढंग से स्थापित किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके योगदान और सनातन संस्कृति से परिचित हो सकें।प्रतिनिधियों ने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर संपूर्ण सनातन हिंदू समाज की पूजनीय हैं और उनके द्वारा स्थापित तीर्थों की सुरक्षा शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि उनकी धरोहरों के साथ अन्याय हुआ तो पाल समाज शांतिपूर्ण आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
ज्ञापन सौंपे जाने के दौरान बड़ी संख्या में पाल समाज के लोग उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में घाट की मूल संरचना की रक्षा और प्रतिमा की शीघ्र पुनर्स्थापना की मांग करते हुए प्रशासन से त्वरित सकारात्मक कार्रवाई की अपेक्षा जताई।

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