शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद तूल पकड़ा, बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने दिया इस्तीफा, सरकार और जनप्रतिनिधियों पर लगाए गंभीर आरोप

मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इसी बीच बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने ब्राह्मण समाज पर अत्याचार का आरोप लगाते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। गणतंत्र दिवस के दिन पीसीएस अधिकारी के इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में, बल्कि प्रशासनिक अमले में भी हलचल मच गई है।इस्तीफे के बाद मीडिया से बातचीत में अलंकार अग्निहोत्री ने यूपी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य में ब्राह्मण विरोधी अभियान चलाया जा रहा है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान उनके बटुक शिष्यों के साथ जिस तरह से चोटी पकड़कर, घसीटकर और पीटकर अपमान किया गया, वह ब्राह्मण समाज की शिखा और सांस्कृतिक प्रतीकों का अपमान है।


पीसीएस अधिकारी ने दावा किया कि इस घटना से जुड़े वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें बुजुर्ग संन्यासियों को जूते-चप्पलों से पीटते हुए दिखाया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर प्रशासन ही इस तरह का संदेश देगा, तो समाज के अन्य वर्ग ब्राह्मणों के साथ कैसा व्यवहार करेंगे।अलंकार अग्निहोत्री ने ब्राह्मण सांसदों और विधायकों की चुप्पी पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जो जनप्रतिनिधि खुद को ब्राह्मण समाज का नेता बताते हैं, वे इस पूरे मामले पर चुप बैठे हैं। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि अगर उनमें थोड़ी भी रीढ़ और शर्म बची है, तो उन्हें अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए।पीसीएस अधिकारी ने यह भी दावा किया कि सामान्य वर्ग अब भाजपा और यूपी सरकार से खुद को अलग महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार सामान्य वर्ग से कट चुकी है और मौजूदा स्थिति में केवल भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर उठे विवाद पर उन्होंने कहा कि एक ओर प्रशासन यह सवाल उठा रहा है कि वह शंकराचार्य हैं या नहीं, जबकि इससे पहले राजभवन से लेकर बड़े-बड़े सरकारी कार्यक्रमों में उन्हें आमंत्रित किया जाता रहा और उनके चरण स्पर्श भी किए गए। उन्होंने कहा कि मौनी अमावस्या के दिन उनके और उनके शिष्यों के साथ हुआ व्यवहार निंदनीय है।अलंकार अग्निहोत्री ने बताया कि उन्होंने अपना इस्तीफा जिलाधिकारी, उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और राज्यपाल को ईमेल के माध्यम से भेज दिया है। आगे की रणनीति को लेकर उन्होंने कहा कि अब वे समाज की प्रतिक्रिया का इंतजार करेंगे, साथ ही ब्राह्मण सांसदों और विधायकों की प्रतिक्रिया पर भी नजर रहेगी।फिलहाल इस पूरे मामले ने प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर बहस छेड़ दी है, जबकि सरकार या प्रशासन की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।



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