यूनियन बैंक और बैंक ऑफ इंडिया के विलय से बनेगा देश का दूसरा सबसे बड़ा सरकारी बैंक

भारत सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) को और अधिक मजबूत व प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए एक और बड़े बैंक विलय की दिशा में कदम बढ़ा सकती है। सूत्रों के अनुसार, सरकार यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ इंडिया को मर्ज करने की योजना पर विचार कर रही है। यदि यह प्रस्ताव अमल में आता है, तो यह नया बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा सरकारी बैंक बन जाएगा।


जानकारी के मुताबिक, इस संभावित विलय का मुख्य उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली को सशक्त बनाना, पूंजीगत मजबूती बढ़ाना और परिचालन दक्षता में सुधार करना है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ इंडिया—दोनों का देशभर में बड़ा शाखा नेटवर्क है। इनके एकीकरण से न सिर्फ संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि ग्राहकों को डिजिटल बैंकिंग, ऋण सुविधाओं और अन्य सेवाओं में भी सुधार देखने को मिल सकता है।विशेषज्ञों का मानना है कि इस मर्जर से बड़े प्रोजेक्ट्स को फाइनेंस करने की बैंकों की क्षमता बढ़ेगी, साथ ही एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों) के प्रबंधन में भी मदद मिलेगी। इसके अलावा, प्रशासनिक खर्च कम होने और तकनीकी ढांचे के एकीकरण से बैंक की कुल कार्यक्षमता में इजाफा होने की उम्मीद है।

हालांकि, इस प्रस्ताव पर अभी तक सरकार या दोनों बैंकों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। कर्मचारियों, ग्राहकों और निवेशकों की नजरें अब सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं। यदि यह विलय होता है, तो यह भारतीय बैंकिंग इतिहास का एक और बड़ा कदम साबित होगा, जैसा कि इससे पहले कई सरकारी बैंकों के सफल विलय देखे जा चुके हैं।फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस योजना को कब और किस रूप में आगे बढ़ाती है।






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