दिल्ली के रामलीला मैदान इलाके में रात फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास चल रहे अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान हिंसा भड़क गई। इस दौरान कुछ लोगों ने पुलिसकर्मियों पर पत्थर और कांच की बोतलें फेंकी, जिसमें 5 पुलिसकर्मी घायल हो गए। हालात को काबू में करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।पूरा मामला उस समय बिगड़ा, जब सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हुई, जिसमें दावा किया गया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान मस्जिद को गिराया जा रहा है। न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार, यह पोस्ट खालिद मलिक नाम के व्यक्ति की थी। वीडियो में उसने लोगों से बड़ी संख्या में अपने घरों से बाहर निकलने और मौके पर पहुंचने की अपील की थी।पोस्ट वायरल होते ही बड़ी संख्या में लोग फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास इकट्ठा हो गए। इसी दौरान कुछ उपद्रवियों ने पुलिस और नगर निगम दिल्ली (MCD) के कर्मचारियों पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
पुलिस ने इस मामले में अब तक एक नाबालिग समेत 5 उपद्रवियों को हिरासत में लिया है। पूरे इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और हालात पर नजर रखी जा रही है।इस बीच फैज-ए-इलाही मस्जिद की प्रबंधन समिति ने MCD के 22 दिसंबर 2025 के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। आदेश में मस्जिद के बाहर करीब 0.195 एकड़ जमीन पर बने ढांचों को अवैध बताते हुए उन्हें हटाने की बात कही गई है। MCD का कहना है कि अतिरिक्त जमीन पर मालिकाना हक या वैध कब्जे से जुड़े कोई दस्तावेज पेश नहीं किए गए हैं।MCD का यह आदेश 12 नवंबर 2025 को दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के निर्देशों के आधार पर जारी किया गया था। डिवीजन बेंच ने तुर्कमान गेट के पास रामलीला ग्राउंड क्षेत्र से करीब 38,940 वर्ग फुट अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए थे।
इसमें सड़क, फुटपाथ, बारात घर, पार्किंग और एक निजी क्लिनिक शामिल हैं।वहीं, मस्जिद समिति का कहना है कि संबंधित जमीन वक्फ संपत्ति है, जिसके लिए वह वक्फ बोर्ड को लीज किराया देती है। समिति ने स्पष्ट किया है कि अतिक्रमण हटाने पर उन्हें आपत्ति नहीं है और बारात घर तथा निजी क्लिनिक का संचालन पहले ही बंद किया जा चुका है। हालांकि समिति ने कब्रिस्तान से जुड़ी जमीन को लेकर आपत्ति जताई है।6 जनवरी को ही दिल्ली हाईकोर्ट ने मस्जिद और कब्रिस्तान से सटी जमीन से अतिक्रमण हटाने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया था। इस मामले में कोर्ट ने MCD, शहरी विकास मंत्रालय, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), दिल्ली वक्फ बोर्ड समेत अन्य संबंधित विभागों से जवाब मांगा है।जस्टिस अमित बंसल ने कहा था कि मामला सुनवाई योग्य है और सभी पक्षों को चार हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को निर्धारित की गई है।

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