तथ्यों से परे आरोपों पर विराम लगे, प्रशासन निष्पक्षता बनाए रखे – हाजी अब्दुल समद अंसारी

वाराणसी में विधानसभा मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बीच उठा ‘वोट जिहाद’ का मामला जांच के बाद ठंडा पड़ता नजर आ रहा है। स्टांप एवं पंजीयन शुल्क राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल द्वारा मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नामों की कथित हेराफेरी और लगभग 9000 मतदाताओं के नाम कई स्थानों पर दर्ज होने का आरोप लगाया गया था। उन्होंने जिला निर्वाचन अधिकारी एवं जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार को ज्ञापन सौंपते हुए मामले की जांच की मांग की थी और इसमें मुस्लिम वर्ग के मतदाताओं की संख्या अधिक होने की बात कही थी।सोमवार को सांस्कृतिक संकुल में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा से जब इस संबंध में प्रश्न किया गया तो उन्होंने जिलाधिकारी को तथ्य स्पष्ट करने को कहा। जिलाधिकारी ने बताया कि मंत्री की ओर से 4500 मतदाताओं की सूची उपलब्ध कराई गई थी। जांच में इनमें से केवल आठ नाम संदिग्ध पाए गए, जबकि शेष मामलों में डुप्लीकेट प्रविष्टि की पुष्टि नहीं हुई। 

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि एक ही नाम के कई मतदाता होना अलग बात है, परंतु उसे डुप्लीकेट मानने के लिए अन्य साक्ष्य आवश्यक होते हैं। संदिग्ध मामलों में आगे की कार्रवाई मंशा की जांच के आधार पर की जाएगी।इधर, शहर उत्तरी विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक हाजी अब्दुल समद अंसारी ने जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि जब जांच में आरोप निराधार पाए गए हैं तो इस प्रकरण में अनावश्यक कार्रवाई आगे न बढ़ाई जाए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित तथ्यों के आधार पर सहायक निर्वाचन अधिकारी द्वारा कराई गई जांच में आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला है।इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट किया गया है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ जारी है और किसी भी शिकायत की निष्पक्ष जांच की जाएगी। फिलहाल जांच रिपोर्ट के सामने आने के बाद ‘वोट जिहाद’ के आरोपों को लेकर राजनीतिक हलकों में उठी गर्माहट कम होती दिखाई दे रही है।



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