25वें भारत रंग महोत्सव के तहत राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) के छात्रों ने महाकवि भवभूति रचित संस्कृत नाटक मालतीमाधवम् का सशक्त मंचन किया। नागरी नाटक मंडली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय नाट्य महोत्सव के मंच पर प्रस्तुत यह नाटक दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।नाटक का निर्देशन एनएसडी के सहायक प्राध्यापक (शास्त्रीय भारतीय नाट्य) विवेक एम्मानेनी ने किया।
कलाकारों ने पारंपरिक आंगिक और वाचिक अभिनय के संतुलन के माध्यम से जटिल संस्कृत संवादों को भी सहज और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया, जिससे दर्शक कथा से निरंतर जुड़े रहे।अजय कुमार के संगीत संयोजन और स्वाति दुबे की परिधान परिकल्पना ने प्रस्तुति को दृश्य काव्य का रूप दिया। वहीं गुंजन शुक्ला की प्रकाश व्यवस्था और मंच-सज्जा ने अघोरियों एवं कपालकुंडला से जुड़े दृश्यों में रहस्यमयी वातावरण रचा, जिसने नाटक की गंभीरता और प्रभाव को और गहराया।
मालतीमाधवम् की कथा उज्जयिनी के मंत्री की पुत्री मालती और विदर्भ के माधव के इर्द-गिर्द घूमती है। यह केवल प्रेम कथा नहीं, बल्कि सत्ता के षड्यंत्रों, तांत्रिक क्रियाओं और बलिदान के बीच मानवीय मूल्यों की विजय का सशक्त आख्यान है।27 जनवरी से प्रारंभ हुए इस महोत्सव में भारत सहित विश्व के सात महाद्वीपों की 228 से अधिक बोलियों और भाषाओं की प्रस्तुतियां शामिल की गईं। महोत्सव का स्वरूप समावेशी रहा, जिसमें जनजातीय रंगमंच और बाल रंगमंच को भी प्रमुख स्थान दिया गया।कार्यक्रम के समापन पर तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा परिसर गूंज उठा, जो इस प्रभावशाली प्रस्तुति की सफलता का प्रमाण बनी।

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