लखनऊ |उत्तर प्रदेश की राजनीति में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के एक विधायक ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश में शिक्षकों से पढ़ाने के बजाय कुत्तों की गिनती जैसे कार्य कराए जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब शिक्षक गैर-शैक्षणिक कार्यों में व्यस्त रहेंगे, तो छात्रों की पढ़ाई कैसे सुचारु रूप से हो पाएगी।विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ने भी कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि आम जनप्रतिनिधियों की बात तक नहीं सुनी जा रही। उन्होंने टिप्पणी की, “स्थिति यह है कि दरोगा तक फोन नहीं उठाते।” इस बयान के बाद सदन में कुछ समय के लिए हंगामे की स्थिति भी बन गई।क्या है पूरा मामला?सपा विधायक का आरोप है कि प्रदेश के कई जिलों में शिक्षकों को प्रशासनिक सर्वेक्षण और अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जा रहा है।
इनमें आवारा कुत्तों की गिनती जैसे कार्य भी शामिल बताए गए हैं। विधायक ने कहा कि इससे स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है और छात्रों का भविष्य दांव पर लग रहा है।सरकार का पक्ष सरकार की ओर से अभी तक इस बयान पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि समय-समय पर शिक्षकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं और सर्वेक्षणों में सहयोग के लिए लगाया जाता है, लेकिन इससे शैक्षणिक गतिविधियों पर असर न पड़े, इसका ध्यान रखा जाता है।शिक्षा व्यवस्था पर बढ़ी सियासतइस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरने की रणनीति तेज कर दी है। उनका कहना है कि पहले से ही शिक्षक संख्या की कमी और संसाधनों के अभाव से जूझ रहे स्कूलों में इस तरह के अतिरिक्त कार्य शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं।वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए शिक्षा और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे आने वाले दिनों में और अधिक गरमा सकते हैं।

