पीलीभीत में यूपी बोर्ड परीक्षाओं को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने निजी स्कूलों को कड़ी चेतावनी देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि बकाया फीस के नाम पर किसी भी छात्र-छात्रा को बोर्ड परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जाएगा।जिलाधिकारी ने कहा कि फीस जमा न होना किसी भी छात्र को परीक्षा से वंचित करने का वैध आधार नहीं है। उन्होंने जनपद के सभी प्रधानाचार्यों और विद्यालय प्रबंधकों को निर्देशित किया है कि किसी भी परीक्षार्थी को केवल बकाया शुल्क के कारण परीक्षा में शामिल होने से नहीं रोका जाए।उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि इस संबंध में किसी छात्र या अभिभावक की शिकायत मिलती है तो संबंधित प्रधानाचार्य और विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। छात्रों के भविष्य से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रवेश पत्र रोकने पर भी कार्रवाई
जिलाधिकारी ने यह भी निर्देश दिए हैं कि सभी परीक्षार्थियों को समय पर प्रवेश पत्र उपलब्ध कराना संबंधित प्रधानाचार्य और केंद्र व्यवस्थापक की पूर्ण जिम्मेदारी होगी। यदि कोई स्कूल प्रवेश पत्र रोकने या परीक्षा केंद्र में प्रवेश देने से इनकार करता है तो प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप करेगा।उन्होंने कहा कि बोर्ड परीक्षा छात्रों के जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है और आर्थिक स्थिति या बकाया शुल्क के कारण किसी का शैक्षणिक भविष्य अधर में नहीं लटकाया जा सकता। साथ ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों को जमीनी स्तर पर निगरानी रखने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी छात्र का मानसिक उत्पीड़न न हो।
निजी स्कूलों में मची हलचल
प्रशासन के इस आदेश के बाद उन निजी स्कूलों में हलचल मच गई है जो फीस वसूली के लिए बोर्ड परीक्षाओं को दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल करते थे। वहीं, अभिभावकों ने जिलाधिकारी के इस मानवीय और कड़े फैसले का स्वागत किया है।

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