काशी की प्राचीन धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के अनुरूप भगवान शिव की पौराणिक शिव बारात का भव्य आयोजन इस वर्ष भी श्रद्धा एवं उल्लास के साथ संपन्न हुआ। शिव बारात का शुभारंभ कर्दमेश्वर महादेव मंदिर से विधिवत पूजन-अर्चन के पश्चात हुआ। बारात कंदवा से निकलकर चितईपुर मार्ग का भ्रमण करते हुए पुनः मंदिर परिसर में पहुंची।मंदिर के पुजारी गोपाल जी गिरी ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह शिव बारात भगवान शिव के विवाह उत्सव का प्रतीकात्मक स्वरूप है। इस दिव्य यात्रा में हजारों की संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे बाबा भोलेनाथ के गणों के स्वरूप में बाराती बनकर शामिल हुए। पूरे मार्ग में हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
चितईपुर पहुंचने के उपरांत शिव बारात पुनः मंदिर लौटी, जहां परंपरा अनुसार बिना सरोवर की परिक्रमा करते हुए बारात को मंदिर परिसर में विधिवत प्रवेश कराया गया। इसके पश्चात माता पार्वती के साथ भगवान शिव के दिव्य विवाह समारोह का आयोजन वैदिक मंत्रोच्चार एवं पारंपरिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने इस अलौकिक विवाह उत्सव के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया।इस अवसर पर हंसराज विश्वकर्मा (भाजपा जिलाध्यक्ष व एमएलसी) एवं एमएलसी प्रत्याशी पंकज सिंह ‘डब्लू’ विशेष रूप से उपस्थित रहे। दोनों ने स्वयं अपने कंधों पर बाबा की सुसज्जित पालकी उठाकर श्रद्धा व्यक्त की। पूरे मार्ग में अबीर गुलाल उड़ाते हुए भक्तों के साथ चल रहे जनप्रतिनिधियों ने भक्ति और उत्साह का वातावरण और प्रगाढ़ कर दिया।धार्मिक अनुष्ठानों, लोक आस्था और जनसहभागिता से संपन्न यह आयोजन काशी की जीवंत आध्यात्मिक परंपरा और सनातन संस्कृति का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है। शिव बारात के माध्यम से क्षेत्र में सामाजिक समरसता, एकता और भक्ति भाव का संदेश प्रसारित हुआ।

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