सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में स्वामी करपात्री जी के ग्रंथों को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर हुई चर्चा

सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में शनिवार को धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी द्वारा रचित ग्रंथों को विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में देश के वरिष्ठ संत स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी तथा युवा चेतना के राष्ट्रीय संयोजक रोहित कुमार सिंह सहित कई विद्वान और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।बैठक में वक्ताओं ने कहा कि स्वामी करपात्री जी का साहित्य भारतीय धर्म-दर्शन, सनातन वैदिक परंपरा और सांस्कृतिक चेतना का महत्वपूर्ण स्रोत है। उनके ग्रंथों में वेद, उपनिषद, स्मृति और पुराणों की गहन व्याख्या मिलती है, जो विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल स्वरूप को समझने में सहायक हो सकती है। इस दौरान उनके साहित्य को विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल करने की दिशा में गंभीर पहल करने पर जोर दिया गया।

कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि स्वामी करपात्री जी का साहित्य भारतीय संस्कृति, दर्शन और सनातन वैचारिक परंपरा की अमूल्य धरोहर है। उनके ग्रंथों को पाठ्यक्रम में शामिल करने से विद्यार्थियों को शास्त्रीय परंपरा और भारतीय चिंतन की गहराई को समझने का अवसर मिलेगा। उन्होंने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय के वेद विभाग में ‘वेद विचार विमर्श’ पाठ्यक्रम के अंतर्गत इस विषय पर अध्ययन भी कराया जा रहा है और विधिक प्रक्रिया के तहत इसे पाठ्यक्रम में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा कि स्वामी करपात्री जी का साहित्य केवल धार्मिक ग्रंथों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह भारतीय संस्कृति, समाज व्यवस्था और वैदिक जीवन मूल्यों की गहन व्याख्या करता है। यदि विद्यार्थियों को भारतीय परंपरा की सही समझ देनी है तो ऐसे महान संतों के साहित्य का अध्ययन आवश्यक है।इस अवसर पर डॉ. विनोद डोंगरा, प्रो. जितेन्द्र कुमार, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, प्रो. अमित कुमार शुक्ल, परीक्षा नियंत्रक दिनेश कुमार सहित अन्य लोग मौजूद रहे।



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