वाराणसी। धर्मनगरी काशी में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के एक बयान को लेकर संत समाज में तीखी नाराजगी देखने को मिल रही है। इस मुद्दे पर काशी के प्रमुख संतों ने नरहरपुरा स्थित पातालपुरी मठ में एक अहम बैठक आयोजित कर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। बैठक में रामानंदी संप्रदाय के खिलाफ की गई टिप्पणी को लेकर संतों ने इसे सनातन परंपरा और संत समाज की गरिमा पर आघात बताया।बैठक की अध्यक्षता जगद्गुरु बालकदेवाचार्य जी महाराज ने की, जिसमें काशी के विभिन्न मठों और अखाड़ों से जुड़े संत-महंत बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। संतों ने कहा कि रामानंदी संप्रदाय सनातन धर्म की एक प्राचीन और प्रतिष्ठित परंपरा है, जिसने सदियों से समाज में धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में इस संप्रदाय को लेकर की गई टिप्पणी संत समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली है।
संतों ने कहा कि धर्म से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से दिए जाने वाले बयान अत्यंत सोच-समझकर दिए जाने चाहिए। इस प्रकार के बयान न केवल संत समाज को आहत करते हैं बल्कि समाज में भ्रम और अनावश्यक विवाद की स्थिति भी पैदा करते हैं।बैठक में यह भी कहा गया कि सनातन धर्म की एकता और उसकी परंपराओं को बनाए रखना सभी संतों और धार्मिक नेताओं की जिम्मेदारी
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