उत्तर प्रदेश में अंडों को लेकर एक अहम बदलाव सामने आया है। राज्य के अधिकारियों के अनुसार अब अंडों पर एक्सपायरी डेट लिखना अनिवार्य नहीं किया जाएगा। इस फैसले के पीछे मुख्य वजह कीमतों में संभावित बढ़ोतरी को बताया जा रहा है।अधिकारियों का कहना है कि यदि अंडों पर एक्सपायरी डेट अनिवार्य की जाती है, तो इससे पैकेजिंग, स्टोरेज और परिवहन की लागत बढ़ेगी। इसका सीधा असर बाजार में अंडों के दाम पर पड़ेगा, जिससे आम उपभोक्ता पर अतिरिक्त बोझ आ सकता है।
दूसरे राज्यों पर निर्भरता
प्रदेश में अंडों की भारी मांग को देखते हुए उत्तर प्रदेश अभी भी दूसरे राज्यों पर काफी हद तक निर्भर है। रोजाना करीब 1.5 करोड़ अंडे अन्य राज्यों से मंगाए जाते हैं, जिससे सप्लाई चेन पहले से ही संवेदनशील बनी हुई है।
व्यापारियों और उपभोक्ताओं की चिंता
इस फैसले पर व्यापारियों का मानना है कि एक्सपायरी डेट अनिवार्य होने से नुकसान और बर्बादी बढ़ सकती थी, खासकर छोटे विक्रेताओं के लिए। वहीं, कुछ उपभोक्ताओं ने खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है और अंडों की गुणवत्ता की जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराने की मांग की है।
सरकार का संतुलन बनाने का प्रयास
सरकार फिलहाल कीमतों और सप्लाई को संतुलित रखने पर जोर दे रही है, ताकि बाजार में अंडों की उपलब्धता बनी रहे और दाम नियंत्रित रहें।

