बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान संस्थान में 18-19 अप्रैल को आयोजित दो दिवसीय “कृषि-उद्योग, शिक्षा जगत और किसानों का सम्मेलन–2026” का शनिवार को भव्य शुभारंभ हुआ। सम्मेलन का उद्घाटन कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने किया। कार्यक्रम का उद्देश्य कृषि, उद्योग और शिक्षा के बीच समन्वय स्थापित कर किसानों को आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं से जोड़ना है।उद्घाटन सत्र में कुलपति प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि आज के दौर में कृषि को पारंपरिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाकर एक सशक्त उद्योग के रूप में विकसित करना समय की मांग है। उन्होंने विश्वविद्यालयों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि शोध और नवाचार सीधे किसानों तक पहुंचना चाहिए, तभी कृषि क्षेत्र में स्थायी विकास संभव होगा।
सम्मेलन के मुख्य वक्ता चार्टर्ड अकाउंटेंट धनंजय कुमार ओझा ने “गवर्नमेंट स्कीम, सब्सिडी, ग्रांट्स एवं कृषि उद्योग” विषय पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ तभी प्रभावी होगा, जब किसानों तक उनकी सही और समय पर जानकारी पहुंचे। इसके लिए ग्रामीण स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता बताई।उन्होंने Farmer Producer Organizations (FPOs) को बढ़ावा देने पर बल देते हुए कहा कि इससे छोटे और सीमांत किसान संगठित होकर अपनी उत्पादकता और बाजार पहुंच बढ़ा सकते हैं। साथ ही कृषि क्षेत्र में स्टार्टअप्स और MSME को प्रोत्साहित करने, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के उपयोग और नवाचार आधारित मॉडल अपनाने की जरूरत पर भी जोर दिया।धनंजय ओझा ने Public-Private Partnership (PPP) मॉडल को कृषि और उद्योग के बीच मजबूत कड़ी बताते हुए कहा कि निजी क्षेत्र की तकनीकी दक्षता और निवेश को सरकारी संसाधनों से जोड़कर कृषि में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और किसानों के बीच आधुनिक खेती, जैविक कृषि, मूल्य संवर्धन, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन और बाजार विस्तार जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। बड़ी संख्या में किसानों, शोधार्थियों, उद्यमियों और विद्यार्थियों की भागीदारी ने कार्यक्रम को और प्रभावी बनाया।अंत में धनंजय कुमार ओझा ने कहा, “जब किसान सशक्त होगा, तभी भारत आत्मनिर्भर और विकसित बनेगा। खेती को उद्योग से जोड़ना ही भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है।”यह दो दिवसीय सम्मेलन कृषि, शिक्षा और उद्योग के बीच मजबूत सेतु बनकर किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

