संकटमोचन संगीत समारोह की चौथी निशा गुरुवार को भक्ति और शास्त्रीय संगीत के अद्भुत संगम के रूप में संपन्न हुई। देश-विदेश से आए ख्यातिप्राप्त कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।कार्यक्रम की शुरुआत सरोद वादक पं. देवज्योति बोस ने की, जिनके साथ तबले पर पं. कुमार बोस एवं रोहेन बोस ने संगत कर शानदार प्रस्तुति दी। इसके बाद कृतिया नरसिंह राणा ने ओडिसी नृत्य की भावपूर्ण प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया।दक्षिण भारतीय संगीत की छटा बिखेरते हुए पं. यू. राजेश, पं. राजेश वैद्या, पं. ओजश अधिया एवं मोहन रामन ने सामूहिक प्रस्तुति दी, जिसने उत्तर और दक्षिण भारतीय संगीत का सुंदर संगम प्रस्तुत किया।
भजन सम्राट पं. अनूप जलोटा ने अपने भक्ति गीतों से पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। उनकी प्रस्तुति पर श्रोता देर तक भक्ति रस में झूमते रहे। तबले पर पं. प्रदीप घोष ने संगत कर कार्यक्रम को और ऊंचाई दी।आगे पं. सतीश व्यास और पं. आदित्य कल्याणपुर की जुगलबंदी ने शास्त्रीय संगीत की गहराई को प्रस्तुत किया। वहीं पं. अजय पोहनकर, पं. संजू सहाय, पं. धर्मनाथ मिश्र और विनायक सहाय ने अपनी प्रस्तुति से माहौल को सुरमयी बना दिया।अंतिम चरण में पं. जयतीर्थ मेउंडी ने पांडूरंग पवार, पं. विनय मिश्र एवं विनायक सहाय के साथ देर रात तक यादगार प्रस्तुति दी।कोलकाता, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, पुणे, लखनऊ, जालंधर, धारवाड़, दिल्ली और लंदन से आए कलाकारों की विविध प्रस्तुतियों ने इस निशा को विशेष बना दिया। भारी संख्या में उपस्थित श्रोताओं ने भक्ति और शास्त्रीय संगीत का भरपूर आनंद लिया।संकटमोचन संगीत समारोह की चौथी निशा कला, संगीत और आध्यात्म का अद्भुत संगम बनकर सभी के मन में अपनी अमिट छाप छोड़ गई।

