फर्जी रसीद देकर लाखों की वसूली! चौकाघाट डिविजन में बड़ा बिजली बिल घोटाला उजागर

पूर्वांचल डिस्कॉम के चौकाघाट डिविजन में सरकारी धन के गबन और उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी का गंभीर मामला सामने आया है। काशी विद्यापीठ उपकेंद्र से जुड़े उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया है कि बिजली बिल जमा करने के बावजूद उन्हें फर्जी रसीद थमा दी गई और जमा की गई रकम एजेंटों ने हड़प ली।जानकारी के अनुसार, पावर कॉरपोरेशन द्वारा अधिकृत फिंटेक एजेंसी बीएलएस इंटरनेशनल कंपनी के एजेंटों ने इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। एजेंटों ने उपभोक्ताओं से बिल की रकम तो ली, लेकिन उसे विभागीय खाते में जमा नहीं किया। इसके बजाय उन्हें नकली भुगतान पावती दे दी गई। बताया जा रहा है कि यह खेल सिर्फ काशी विद्यापीठ उपकेंद्र तक सीमित नहीं है, बल्कि डिविजन के अन्य उपकेंद्रों में भी इसी तरह की गड़बड़ी कर लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया है।

मामले का खुलासा तब हुआ जब मार्च में बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं के अप्रैल माह के बिजली बिल में बकाया राशि फिर से जुड़कर आ गई। जब उपभोक्ताओं ने बीएलएस काउंटर पर शिकायत की, तो एजेंटों ने तकनीकी खराबी का हवाला देते हुए नई तारीख की रसीद थमा दी। इससे उपभोक्ताओं को शक हुआ और उन्होंने सीधे अधिशासी अभियंता कुमार सौरभ से शिकायत की।जांच में सामने आया कि 22 से अधिक फर्जी भुगतान रसीदें जारी की गई थीं। एक्सईएन कुमार सौरभ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए नगरीय विद्युत वितरण मंडल प्रथम के अधीक्षण अभियंता दिलीप कुमार को पत्र लिखकर अवगत कराया है। साथ ही पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

उदाहरण के तौर पर दो मामले सामने आए—

चौकाघाट डिविजन के उपभोक्ता प्यारे लाल ने 11 मार्च को 540 रुपये जमा किए थे, लेकिन रकम विभाग में जमा नहीं हुई। शिकायत पर एजेंट ने 8 अप्रैल को नई रसीद थमाकर मामला दबाने की कोशिश की। वहीं, अशोक कुमार सोनकर ने 25 मार्च को 1892 रुपये जमा किए थे, लेकिन विभागीय जांच में पता चला कि यह रकम भी खाते में जमा नहीं हुई। बाद में एजेंट ने नई रसीद देकर पल्ला झाड़ लिया।एक्सईएन कुमार सौरभ ने बताया कि उपभोक्ताओं की शिकायत पर प्रारंभिक जांच में गड़बड़ी की पुष्टि हुई है और कई फर्जी रसीदें बरामद की गई हैं। वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है और मामले की गहन जांच जारी है।इस खुलासे के बाद बिजली विभाग में हड़कंप मच गया है। अब देखना होगा कि जांच के बाद दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है और उपभोक्ताओं को उनका पैसा कब तक वापस मिल पाता है।



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