मैथिल समाज, उत्तर प्रदेश द्वारा चौखंभा स्थित भारतेन्दु भवन में मिथिला नववर्ष ‘जुड़ शीतल’ का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि उपजिलाधिकारी परमानंद झा एवं अन्य अतिथियों ने विद्यापति के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन कर किया।इस अवसर पर मुख्य अतिथि परमानंद झा ने कहा कि तेजी से बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग के दौर में पर्यावरण संरक्षण बेहद जरूरी हो गया है। जुड़ शीतल जैसे पर्व हमें प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने बताया कि इस दिन मिथिला में चूल्हा नहीं जलाया जाता और लोग बासी भात, दही, बड़ी जैसे ठंडक देने वाले भोजन ग्रहण करते हैं, जो पूर्वजों की वैज्ञानिक सोच को दर्शाता है।कार्यक्रम में ‘मिथिला मोद’ पत्रिका का लोकार्पण भी किया गया। इस अवसर पर संस्था के प्रदेश अध्यक्ष निरसन कुमार झा (एडवोकेट) ने बताया कि यह पत्रिका मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का कार्य कर रही है। इस वर्ष का विशेषांक मिथिला के लोकनायक गोनू झा को समर्पित है। उन्होंने कहा कि गोनू झा का जीवन
समारोह की अध्यक्षता कर रहे डॉ. अत्रि भारद्वाज ने जुड़ शीतल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व प्रकृति से सीधा जुड़ा है। इस दिन बड़े-बुजुर्ग बच्चों के सिर पर बासी पानी डालकर “जुड़ैल रहु” का आशीर्वाद देते हैं, जिससे मानसिक शीतलता बनी रहती है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में मिथिला की लोक परंपराओं की सुंदर झलक देखने को मिली। झिझिया, डोमचक और जट-जटिन जैसे लोकनृत्यों की मनोहारी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक पं. डॉ. विजय कपूर ने पारंपरिक लोकगीतों की प्रस्तुति देकर समारोह में चार चांद लगा दिए।कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों को वृक्षारोपण के लिए प्रेरित किया गया और सभी अतिथियों को तुलसी के पौधे वितरित किए गए। कार्यक्रम का संचालन गौतम कुमार झा ने किया, जबकि सह-संयोजन मालिनी चौधरी ने संभाला।समारोह में डॉ. जयंत चौधरी, डॉ. संजय, सुधीर चौधरी, मनोज मिश्र, नटवर झा, रंजीत मिश्र, सीता रमण दत्त समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

