संकटमोचन संगीत समारोह की पंचम निशा में सुरों की जादुई छटा, कलाकारों ने बांधा समा

संकटमोचन संगीत समारोह के पंचम दिवस (पंचम निशा) शुक्रवार को विविध विधाओं के उत्कृष्ट कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। पूरी रात चले इस भव्य आयोजन में देश-विदेश के ख्यातिप्राप्त कलाकारों ने शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य की समृद्ध परंपरा को सजीव किया।कार्यक्रम का शुभारंभ कथक नृत्य से हुआ, जिसमें पं० राम मोहन महाराज ने अपनी सशक्त प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया। तबले पर पं० संजू सहाय, सारंगी पर आरिफ खां, संवादिनी पर विनायक सहाय तथा गायन में सिद्धांत चक्रवर्ती ने प्रभावी संगत प्रदान की।

इसके उपरांत सितार वादन में पं० तेजेन्द्र नारायण मजुमदार ने अपनी मधुर तानों से वातावरण को सुरमय बना दिया, जिनके साथ तबले पर पं० कुमार बोस ने उत्कृष्ट संगत की।बांसुरी वादन में पं० रोनू मजुमदार ने अपनी प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके साथ बांसुरी पर हृषिकेश मजुमदार तथा तबले पर रोहेन बोस ने सधे हुए अंदाज में संगत दी।गायन की प्रस्तुति में कंकणा बनर्जी ने अपनी भावपूर्ण आवाज से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। उनके साथ तबले पर पं० समर साहा तथा संवादिनी पर मोहित साहनी ने सुंदर संगत प्रस्तुत की।कार्यक्रम के अंतिम चरण में उस्ताद मसकूर अली खां ने अपने प्रभावशाली गायन से समा बांध दिया और श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा।इस अवसर पर विभिन्न शहरों से आए कलाकारों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया। श्रोताओं की भारी भीड़ और उनकी सराहना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि वाराणसी में शास्त्रीय संगीत के प्रति गहरी आस्था और अनुराग आज भी जीवंत है।



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