संकट मोचन संगीत समारोह की पहली निशा में सजा सुर, साहित्य और नृत्य का अद्भुत संगम

संकट मोचन संगीत समारोह की पहली निशा सोमवार को सुर, साहित्य और कला के विविध रंगों से सराबोर नजर आई। कार्यक्रम की शुरुआत साहित्य मंच से हुई, जहां मालिनी अवस्थी द्वारा लिखित पुस्तक “चंदन किवाड़” का विमोचन महंत प्रो. विश्वम्भर नाथ मिश्र सहित अन्य विद्वानों ने किया।संगीत की प्रस्तुतियों में संतूर वादक पं. राहुल शर्मा ने राग पहाड़ी की मनोहारी धुन प्रस्तुत कर वातावरण को शांत और मधुर बना दिया। उनके साथ तबले पर पं. रामकुमार मिश्र ने सधे हुए अंदाज में संगत की। इससे पूर्व उन्होंने राग गोरख कल्याण में आलाप, जोड़ और झाला की प्रभावी प्रस्तुति दी।

समारोह के अंतर्गत आयोजित अंतरराष्ट्रीय चित्रकला प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रो. एस.एन. शंखवार ने किया। 6 से 11 अप्रैल तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में देश-विदेश के कलाकारों की 1000 से अधिक कृतियां प्रदर्शित की गई हैं, जिनमें काशी की रामलीला से जुड़े चित्र और पारंपरिक मुखौटे विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।नृत्य की प्रस्तुति में कथक नृत्यांगना विधा लाल ने अपने गुरु सितारा देवी को समर्पित भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत किया। शिव स्तुति से आरंभ कर उन्होंने अपनी लय, ताल और भाव-भंगिमाओं से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।पहली निशा के उत्तरार्द्ध में मालिनी अवस्थी ने दादरा और चैती गायन से लोक संगीत की मधुरता बिखेरी। उनके गीतों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उनके साथ हारमोनियम पर पं. धर्मनाथ मिश्र और तबले पर शुभ महाराज ने संगत की।वहीं बनारस घराने के उदीयमान तबला वादक राहुल मिश्र ने अपनी पारंपरिक ‘उठान’ से श्रोताओं का मन मोह लिया। उन्होंने अपनी प्रस्तुति पद्मविभूषण पं. छन्नूलाल मिश्र को समर्पित की।इसके अलावा चंडीगढ़ के हरविंदर शर्मा ने सितार वादन में राग अहीर भैरव और ललित के मिश्रण से नई प्रस्तुति दी, जबकि कोलकाता की शिखा भट्टाचार्य ने कथक नृत्य के माध्यम से हनुमत वंदना प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब सराहना बटोरी।समारोह के अंतर्गत आज साहित्य मंच पर डॉ. सुरेश चंद्र जांगिड, अक्षत सिंह और मो. सुलेमान की संयुक्त प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी।संकट मोचन संगीत समारोह एक बार फिर काशी की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, संगीत और कला के प्रति समर्पण का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।



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