कन्फर्म ट्रेन टिकट होने के बावजूद सीट नहीं मिलने के मामले में उपभोक्ता आयोग ने भारतीय रेलवे को जिम्मेदार ठहराते हुए मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयोग ने कहा कि कन्फर्म टिकट जारी करने के बाद यात्री को उसकी आरक्षित सीट उपलब्ध कराना रेलवे की अनिवार्य जिम्मेदारी है।
शिकायतकर्ता यात्री ने बताया कि यात्रा के दौरान उसकी सीट पर अन्य लोग बैठे मिले और उसे पूरी यात्रा में भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। आरोप है कि शिकायत के बावजूद रेलवे स्टाफ ने स्थिति को सुधारने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए।मामले की सुनवाई के बाद उपभोक्ता आयोग ने इसे सेवा में कमी माना और रेलवे को यात्री को क्षतिपूर्ति राशि तथा वाद व्यय देने का निर्देश दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि केवल टिकट जारी कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यात्रियों को सुरक्षित और सुगम यात्रा सुनिश्चित करना भी रेलवे की जिम्मेदारी है।
इस फैसले को यात्रियों के अधिकारों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयोग के इस आदेश के बाद ऐसे मामलों में प्रभावित यात्री उपभोक्ता मंच का दरवाजा खटखटा कर न्याय और मुआवजा प्राप्त कर सकते हैं।


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