पाण्डेय हवेली स्थित श्री निर्मल शिवानंद आश्रम में रविवार को धार्मिक श्रेणी बैठक का भव्य आयोजन किया गया। संपर्क विभाग केंद्र काशी के तत्वावधान में आयोजित इस बैठक में काशी क्षेत्र के विभिन्न धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं ने सहभागिता कर संगठन की मजबूती, सनातन संस्कृति के संरक्षण तथा सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर विस्तृत मंथन किया।कार्यक्रम में मुख्य मार्गदर्शन क्षेत्र संपर्क प्रमुख पूर्वी उत्तर प्रदेश माननीय मनोज जी ने प्रदान किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज को संगठित करने एवं सनातन मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है। धार्मिक कार्यकर्ताओं की भूमिका समाज में जागरूकता फैलाने और युवाओं को संस्कृति से जोड़ने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सेवा, समर्पण और अनुशासन के भाव से कार्य करने का आह्वान किया।
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित प्रांत संपर्क प्रमुख श्री दीन दयाल पाण्डेय एवं विभाग केंद्र संपर्क प्रमुख काशी श्री राजेश पाठक ने संगठन की गतिविधियों एवं आगामी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की।काशी दक्षिण जिला धार्मिक श्रेणी संपर्क प्रमुख वैदिक विद्वान वी. चन्द्रशेखर द्रविड़ घनपाठी ने कहा कि काशी सदैव धर्म और अध्यात्म की राजधानी रही है तथा यहां से समाज को नई दिशा देने का कार्य निरंतर होता आया है। उन्होंने समाज में बढ़ती नैतिक चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए धार्मिक जागरण एवं संस्कार निर्माण को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।
बैठक में काशी दक्षिण जिला धार्मिक श्रेणी सह प्रमुख डॉ. अभिषेक कुमार दुबे, श्री धुलीपाल्ला नारायण शास्त्री सहित काशी दक्षिण जिला के 13 नगरों के नगर प्रमुख एवं सह प्रमुख उपस्थित रहे। कार्यक्रम में आचार्य भक्तिपुत्र रोहतम जी, आंध्र प्रदेश के सुप्रसिद्ध ज्योतिषी काशीवासी सीवीबी सुब्रमण्यम शास्त्री, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के डॉ. उपेन्द्र त्रिपाठी, रामकथा मर्मज्ञ उलीमीरी सोमैयाजुलु, निर्मल रामनाथ शास्त्री, श्री निर्मल अम्बैया सिद्धांती, हर्षवर्धन बोधराजू एवं करलपालेम रामकृष्ण शर्मा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में डॉ. लेखमणि त्रिपाठी ‘विमल जी’ ने सभी अतिथियों एवं कार्यकर्ताओं का स्वागत करते हुए कहा कि इस प्रकार की बैठकें संगठन को नई ऊर्जा प्रदान करती हैं। बैठक का समापन राष्ट्र एवं धर्महित में निरंतर कार्य करने के संकल्प के साथ हुआ।कार्यक्रम का संचालन वैदिक विद्वान वी. चन्द्रशेखर द्रविड़ घनपाठी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अभिषेक कुमार दुबे ने प्रस्तुत किया।


