वाराणसी में आध्यात्म और परंपरा का अनोखा संगम उस समय देखने को मिला जब प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज के भतीजे श्याम शरण बाबा काशी पहुंचे। अपने प्रवास के दौरान उन्होंने ऐतिहासिक तुलसी घाट पर स्थानीय पहलवानों के साथ गदा फेरी (गदा अभ्यास) कर सभी का ध्यान आकर्षित किया।श्याम शरण बाबा ने इस अवसर पर कहा कि काशी केवल धर्म की नगरी ही नहीं, बल्कि साधना और शक्ति की भूमि भी रही है।
उन्होंने बताया, “हमारे गुरु भी इसी पवित्र स्थल पर साधना किया करते थे, इसलिए यहां आकर विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है।”तुलसी घाट पर हुए इस पारंपरिक प्रदर्शन को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे। स्थानीय अखाड़ों के पहलवानों ने भी बाबा के साथ गदा चलाकर अपनी कला का प्रदर्शन किया, जिससे माहौल उत्साहपूर्ण बन गया।श्याम शरण बाबा का काशी आगमन तुलसी घाट पर गदा फेरी और अखाड़ा परंपरा का प्रदर्शन गुरु परंपरा और काशी की साधना भूमि का उल्लेख स्थानीय लोगों में उत्साह और श्रद्धा का माहौलकाशी में इस तरह की गतिविधियां न केवल परंपरा को जीवित रखती हैं, बल्कि नई पीढ़ी को भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का काम करती हैं।


